प्रदीप अवस्थी
कानपुर। एक जमाना था जब कानपुर के उद्योगपति आनंदराम जयपुरिया ने संकल्प लिया था कि उनके रहते शहर में कोई खरीदकर पानी नहीं पिएगा। उन्होंने और उनके जैसे कई कारोबारियों ने ऐसा करके भी दिखाया। गर्मी के दौरान वे पूरे शहर में सैकड़ों प्याऊ लगवाते और उसकी देखरेख करते। अब आम और खास, सभी को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। हैसियत के मुताबिक कोई कंटेनर से पानी मंगवा रहा तो कोई बोतल बंद पानी से प्यास बुझा रहा। आंकड़े चौंका देने वाले हैं। इस गर्मी में रोज करीब 50 लाख लीटर पानी बिक रहा है। महीने में यह आंकड़ा करीब दो सौ करोड़ रुपये के पार जा रहा है।
मुफ्त में निकालकर बेच रहे पानी
d धरती से मुफ्त में पानी निकालकर बेचने का कारोबार बीते पांच साल में करीब 10 गुना तक बढ़ा है। जैसे-जैसे पानी की किल्लत बढ़ रही है, पानी का धंधा करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। इसमें पानी का वैध कारोबार सिर्फ दो फीसदी ही है। पाउच, बोतल और कैन के जरिए पानी का धंधा करोड़ों रुपये महीने का है। ये न तो वाजिब टैक्स अदा कर रहे न ही मानकों का ध्यान दे रहे।
घरों में पैक हो रहा पानी
d रजिस्टर्ड कारोबारी तो टैक्स चोरी कर ही रहे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो घरों में पानी की बोतल और पाउच पैक कर बेचते हैं। ऐसे लोगों पर विभाग की कोई नजर नहीं है। रजिस्टर्ड न होने की वजह से ऐसे पानी विक्रेता जांच के दायरे भी बाहर रहते हैं।
पानी के दोहन का गणित
रजिस्टर्ड बड़ी फर्में-14
d एक फर्म की प्रतिदिन औसत खपत- एक लाख बोतल (एक लीटर)
d 14 फर्मों की प्रतिदिन औसत खपत- 14 लाख बोतल
d प्रति बोतल कीमत 15 रुपयेॉ
बिना रजिस्टर्ड बड़ी फर्में- करीब 20
d एक फर्म की प्रतिदिन औसत खपत- एक लाख बोतल (एक लीटर)
d 20 फर्मों की प्रतिदिन औसत खपत- 20 लाख बोतल
d प्रति बोतल कीमत 15 रुपये
घरेलू आरओ और चिलर प्लांट
d बिना रजिस्ट्रेशन ः करीब 200 प्लांट
d एक प्लांट की खपत औसत
400 बोतल (20 लीटर कैन)
d 200 प्लांट की खपत
औसत 80,000 बोतल
d कुल पानी की खपत ः 16 लाख लीटर
d प्रति बोतल कीमत ः 20 से 30 रुपये
नोटः- शादी व अन्य समारोहों में इन्हीं बोतलों (चलन की भाषा गैलन) से पानी की सप्लाई की जाती है।