कानपुर देहात। समूह की महिलाएं स्वास्थ्य सखी बनकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगी। इसके लिए 190 महिलाओं को चयन कर प्रशिक्षित किया गया है। अब इन्हें ग्राम संगठनों में तैनात किए जाने की तैयारी है। इन्हें महीने में 10 दिन काम करना होगा। इसके लिए इन्हें मानदेय भी दिया जाएगा।
ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में नौ हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इनसे जुड़ी करीब एक लाख से अधिक महिलाओं को उनके कौशल के अनुसार प्रशिक्षण देकर कारोबार से जोड़ा गया है। इससे वह स्वयं की आमदनी कर आत्मनिर्भर बन रही है। वहीं इनके बीच से कई महिलाओं को बैंक सखी, बीमा सखी के रूप में ग्राम संगठनों में तैनात किया गया है। योजना के तहत समूह की 190 महिलाओं को स्वास्थ्य सखी के रूप में चयनित कर प्रशिक्षित किया गया है। जबकि पहले के करीब 79 महिलाएं ग्राम संगठन स्तर पर तैनात होकर कार्य कर रही हैं।
जिला मिशन प्रबंधक बृजेश गौतम ने बताया कि स्वास्थ्य सखी के रूप में कार्य करने वाली महिलाएं ग्रामीण परिवारों में खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता की जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक करेंगी। इसमें गर्भवती, धात्री व पांच साल की उम्र के बच्चों का टीकाकरण व परामर्श प्राप्त करवाने के लिए प्रेरित करेंगी। इन्हें ग्राम संगठन की मासिक बैठक में स्वास्थ्य संबंधी हुई गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध करनी होगी। इसमें स्वास्थ्य विभाग से सहायता लेते हुए ग्राम स्तर पर आशा, आंगनबाड़ी व एएनएम की सहभागिता करवाई जाएगी। इन्हें 10 दिन कार्य करने पर 150 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 1500 रुपये संसाधन शुल्क के रूप में दिए जाएंगे। इसके अलावा क्षेत्र में भ्रमण करने का 500 व टीकाकरण आदि के लिए दो दिन अतिरिक्त कार्य करने पर 200 रुपये अलग से दिए जाएंगे।
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स्वास्थ्य सखी के माध्यम से समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रही है। ग्राम संगठन स्तर पर पहले से कार्य कर रहीं 79 स्वास्थ्य सखी के अतिरिक्त 190 अन्य महिलाओं का चयन कर प्रशिक्षित किया गया है। इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए जल्द ही और महिलाओं का चयन किया जाएगा। - गंगाराम वर्मा, उपायुक्त, एनआरएलएम