चकरनगर। मध्य प्रदेश व आसपास के क्षेत्र में लगातार तीन दिन से हो रही बारिश के चलते बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। इसी के चलते गुरुवार को कोटा बैराज से 18 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी छोड़े जाने से जिले में चंबल नदी का जलस्तर अचानक डेढ़ मीटर बढ़ गया। जिले में बुधवार को चंबल का जलस्तर 107.01 मीटर था, वहीं शुक्रवार को यह बढ़कर 108.25 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि इससे खतरे की कोई बात नहीं है। चंबल का चेतावनी बिंदु 119.80 मीटर व खतरे का निशान 120.80 मीटर पर है। जो दोनों से काफी दूर है।
जलस्तर बढ़ने से चंबल नदी उफान मारती दिखाई दी। अगस्त माह में आई भीषण बाढ़ के बाद नदी सामान्य स्थिति में पहुंच गई थी, लेकिन अब अचानक बढ़े पानी से सहसों, नदा, ढकरा, लालपुरा, बंसरी, भरेह, पालीघार, गुपियाखार, कंधावली सहित करीब 24 गांवों के किसान इस बात से चिंतित हैं कि चंबल का पानी उनके खेतों तक पहुंच सकता है। किसान राजेश, अनिल, अखिलेश, अभिराज और प्रेम सिंह ने बताया कि बाढ़ के दौरान बाजरे की फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है। अब नदी किनारे बोई गई सरसों की फसल को खतरा हो जाएगा। उधर, आगामी चार और पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर पंचनद संगम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करने पहुंचेंगे। चंबल में बढ़ते पानी से मेले की तैयारियों में जुटी मेला समिति और प्रशासन की चिंता बढ़ गई हैं। एसडीएम ब्रह्मानंद कठेरिया ने बताया कि बारिश के कारण बांधों से कुछ पानी छोड़ा गया है। फिलहाल नदी में स्थिति सामान्य है और किसी प्रकार का नुकसान नहीं है।