बबेरू के दंगल मैदान में स्थित गोशाला में खुले आसमान तले बंद की गईं गायें
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बांदा में ठंड और चारा-भूसा के अभाव में गोशालाओं में हो रही गायों की मौतों को पहले नकारने के बाद अब अफसर स्वीकारने लगे हैं। इसकी बानगी अतर्रा नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित कान्हा पशु आश्रय केंद्र है। इसी माह कई दिन हुई बारिश के बाद यहां मरीं कई गायों की खबरों को पहले गलत बताया गया। अब एसडीएम ने स्वीकारा है कि 12 से 16 दिसंबर तक (5 दिन) 17 गोवंशों की मौत हुई है। एसडीएम ने कहा है कि इसमें चार दुर्घटनाग्रस्त थे। पूरे चित्रकूटधाम मंडल के कान्हा पशु आश्रय केंद्र और अस्थायी गोशालाओं में पशुओं के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
पशुपालन विभाग ने खुद स्वीकारा है कि मंडल के चारों जिलों में चल रही 456 गोशालाओं में 158 में टिनशेड नहीं हैं। बारिश, ठंड, कोहरा में पशु खुले आसमान तले कीचड़-दलदल में दिन गुजार रहे हैं। इसी में उनकी मौत हो रही है। अतर्रा नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित कान्हा पशु आश्रय केंद्र में भी इस माह कई गायों की मौत हो गई।
तिदवारी क्षेत्र की गोशालाओं में भी तमाम गायों की मौत हो चुकी है। अतर्रा कान्हा पशु आश्रय केंद्र में अन्ना गायों की मौत को लेकर मंगलवार (17 दिसंबर) को जारी विज्ञप्ति में अतर्रा एसडीएम सौरभ शुक्ला ने कहा है कि कान्हा पशु आश्रय केंद्र में लगभग 400 गोवंश हैं। इस गोशाला में गायों की मौत को लेकर प्रकाशित की जा रही संख्या से भ्रामक स्थिति उत्पन्न हो रही है।
जांच कराने पर अधिशासी अधिकारी ने बताया है कि 12 दिसंबर से 16 दिसंबर तक कुल 17 गोवंशों की मौत हुई है। इनमें 4 दुर्घटनाग्रस्त हैं। जिनकी इलाज के दौरान मृत्यु हुई है। इनके शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। एसडीएम के मुताबिक ठंड से बचाव के लिए टिनशेड और पन्नी लगाए जाने के साथ ही पशुओं को बोरा बांधा जा रहा है। अलाव की भी व्यवस्था की गई है। एसडीएम ने भूसा-पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था का दावा किया।
ठंड में ठिठुर रहीं गोशालाओं की गायें
बबेरू। मढ़ी दाई के पास स्थित दंगल मैदान में अस्थायी गोशाला में बंद अन्ना गायों की जान खतरे में है। यहां उन्हें ठंड से बचाव के लिए टिनशेड या अन्य कोई इंतजाम नहीं है। खुले आसमान तले गायें ठिठुर रही हैं। रोजाना उनकी मौत हो रही है। धान के पयार के अलावा उन्हें कुछ नहीं मयस्सर हो रहा। कमोवेश यही स्थिति रयान, मरका, मझीवां, भभुवा, पतवन, पल्हरी, मुरवल, अछाह, हरदौली, निभौर, शमसुद्दीनपुर आदि गांवों की गोशालाओं की है।
पानी की टंकी तले बंद किए 115 पशु
बांदा। जसपुरा ब्लाक के गलौली गांव में ग्रामीणों ने 115 अन्ना मवेशियों को पानी की टंकी के नीचे बंद कर दिया है। इनके चारे-पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। भाजपा जिला कार्यकारिणी सदस्य बालकृष्ण सिंह ने डीएम को दी अर्जी में बताया कि यहां 15 पशुओं की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों ने आपस में चंदा करके गायों की देखरेख के लिए चार व्यक्ति लगाए हैं, लेकिन आसपास चारा नहीं है। न ही पर्याप्त चंदा हो पा रहा है। कहा कि अन्ना पशुओं को लेकर किसान और मवेशी दोनों की ही दुर्दशा है।