फोटो 29:::जेल रोड पर लगा गंदगी का ढेर। संवाद
इटावा। शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों बेपटरी चल रही है। सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर पालिका ने 1108 सफाई कर्मचारियों को सौंप रखी है। हर माह सफाई पर 1.63 करोड़ खर्च का दावा किया जा रहा है। इसके बाद भी शहर में हर ओर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। बीते माह जारी रैंकिंग में गिरावट ने भी जिले की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए थे लेकिन जिम्मेदारों को इसकी कोई परवाह ही नहीं है।
शहर की नगर पालिका परिषद के पास सफाई व्यवस्था दुरस्त रखने के लिए 117 स्थाई, 116 संविदा व 875 आउटसोर्सिंग कर्मचारी है। इन कर्मचारियों को दिनभर साफ-सफाई करने के साथ ही समय से कूड़ा उठाने की भी जिम्मेदारी है लेकिन कर्मचारी ये जिम्मेदारी उठाने में आनाकानी कर रहे है।
नतीजा ये रहा बीते वर्ष की तुलना में शहर की स्वच्छता रैंकिंग धड़ाम हो गई। वर्ष 2023-24 में जिले की स्वच्छता रैंकिंग प्रदेश स्तर पर 27 थी जो वर्ष 2024-25 में गिरकर 96 पहुंच गई। जुलाई में जारी रैंकिंग के बाद कुछ दिनों तक नगर पालिका के अधिकारियों ने इस बार दशा सुधारने के लिए तमाम कार्य कराने के दावे किए गए लेकिन ये दावे एक माह तक नहीं टिक सके और धड़ाम हो गए। स्वच्छता रैंकिंग जारी होने के एक माह बाद ही शहर की सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई है। शहर के कई मोहल्लों में दोपहर तक कूड़े का उठान हीं नहीं होता है। यही नहीं कुछ मोहल्ले ऐसे भी है जहां पूरे सप्ताह तक कूड़ा ही नहीं उठाया जा रहा है।
एकता कॉलोनी हाईवे सर्विस रोड के किनारे, पक्का बाग ट्रांसफार्मर के पास, सुंदरपुर मोड़, कटरा बलसिंह, जेल रोड सिविल लाइन, ईदगाह चौराहा सहित शहर के कई मोहल्लों में गंदगी का अंबार रहता है। यहां कई दिनों तक कूड़े का उठान न होने से बदबू और गंदगी से लोगों को परेशानी होती है।
सभी सफाई कर्मचारियों को सही ढंग से काम करने के निर्देश दिए है। इसके साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी कर्मचारियों की निगरानी के लिए कहा गया है, फिर भी कूड़ा उठान में लापरवाही बरती जा रही है। तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार मिश्रा, ईओ