कानपुर। राहुल शुक्ला फोटो भी है ------------------------------ सिंधी समाज का चालीहाया महोत्सव चल रहा है। इसी क्रम में समाज का प्रमुख त्योहार थदड़ी सोमवार को है। इसमें एक दिन पहले पकवान बनाकर अगले दिन भगवान झूलेलाल को भोग लगाने के बाद ग्रहण किए जाते हैं। उधर, समाज की महिलाओं ने शाम को पकवान बनाने में तैयारी की। काकादेव सिन्धी समाज के अध्यक्ष श्री मनोज आडवाणी ने बताया कि इस पर्व का समाज पूरे साल इंतजार करता है। इस पर्व की खास बात ये है कि इस दिन समाज के किसी भी घर, फैक्ट्री, कारखाने में चूल्हा या भट्टी जलाना वर्जित है। इसमें एक दिन पूर्व शाम को विभिन्न प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं जैसे कि मिठो लोलो, बेंसंड़ी, टिकर, दालाई फुल्को आदि अनेक व्यंजन बनाये जाते हैं।अगले दिन सुबह घर की महिलाऐं इन व्यंजनों को थाली में सजा कर नारियल और मिठाई के साथ घर के मंदिर में भोग लगाया जाता है।.तत्पश्चात घर के लोग इसे ग्रहण करते हैं। इस अवसर पर घरों में सिन्धी लोकगीत गाये जाते हैं। जिनमें प्रमुख है ठार माता ठार पहुंचे बचणन खे ठार।