फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हादसों को न्योता दे रही 22 मानवरहित रेलवे क्रासिंग

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
उन्नाव। तीन दिन पहले उन्नाव-बालामऊ रेलमार्ग पर ट्रैक्टर ट्रॉली से पैसेंजर ट्रेन के टकराने की घटना ने कुशीनगर में हुए हादसे की याद ताजा कर दी। रेल विभाग मानव रहित रेलवे क्रासिंग खत्म करने का दावा भले ही कर रहा हो लेकिन हकीकत इससे अलग है। जिले के विभिन्न रेलमार्गों पर 22 मानव रहित रेलवे क्रासिंग है। कब कहां बड़ा हादसा हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता।
जिले में मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर कभी भी अप्रैल माह में कुशीनगर में जैसा हादसा हो सकता है। बिना गेट मैन की क्रासिंग पर वाहन चालक मनमाने तरीके से निकलते हैं। कई बार तो वह जल्दबाजी में ट्रेन से पहले निकलने की कोशिश भी करते हैं। तीन दिन पहले उन्नाव-बालामऊ रेल मार्ग पर सुलतानपुर गांव के पास हुई घटना ट्रैक्टर चालक की जल्दबाजी और ट्रेन से पहले निकलने की कोशिश का नतीजा रही। मालूम हो कि उन्नाव बीघापुर रेलमार्ग पर बंड हमीरपुर, जंगली खेड़ा, बेहटा गोपी, प्रेमीखेड़ा, ककरारी, मानपुर शुक्लाखेड़ा, मर्दनपुर समेत 15 मानव रहित रेलवे क्रासिंग है। इन रेलवे क्रासिंगों पर रोज सैकड़ों छोटे बड़े वाहनों और स्कूल वाहनों का आवामगमन होता है। बालामऊ-कानपुर रेलमार्ग पर 7 मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं।
विज्ञापन


इनमें माखी थाना क्षेत्र की कोरारी कला-भदनी मार्ग पर मानव रहित रेलवे क्रासिंग है। इन क्रासिंगों के रास्ते से पारा, कोरारी कला, चेतानखेड़ा, रनागढी, कोरारी खुर्द समेत कई गांवों के सैकड़ों लोग वाहन व पैदल सफर तय करते हैं। साथ ही स्कूल वाहनों की भागदौड़ भी रहती है। इसके अलावा बांगरमऊ स्टेशन के आगे स्थित सुल्तानपुर परमी फुलई मानव रहित रेलवे क्रासिंग है। अप्रैल 2016 में गंजमुरादाबाद की महमदाबाद मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर ट्रेन की चपेट में आने से ट्रैक्टर के परखचे उड़ गए थे। अधिकारियों की अनदेखी से मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर हर दिन हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
जिले की सड़कों पर यातायात नियमों का पालन करा पाने में परिवहन विभाग ही नहीं जिला प्रशासन भी फेल है। स्कूल संचालक छात्रों को स्कूल ले जाने और लाने की बेहतर सुविधा के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूल रहे। जबकि हकीकत है कि परमिट से दोगुना अधिक बच्चों को बैठाकर जान जोखिम में डाल रहे हैं। कन्वेंश सुविधा की एवज में मोटी कमाई करने वाले वाहनों की हालत खस्ताहाल है। वाहन फिटनेस, गैस किट गुणवत्ता, फर्स्टएड बाक्स, अग्निशमन यंत्रों के मानक हवा में उड़ाए जा रहे हैं। वहीं कुछ वाहनों में लगे उपकरण दिखावा मात्र हैं। मौत बनकर दौड़ रहे वाहनों की धमाचौकड़ी से परिवहन विभाग के अलावा जिला प्रशासन पूरी तरह मुंह फेरे है।

उन्नाव बालामऊ रेलमार्ग पर सुल्तानपुर परमी फुलई रेलवे क्रासिंग मानव रहित है। इसके अलावा नसिरापुर, महमदाबाद, कलवारी मार्ग व ताजपुर मार्ग स्थित रेलवे क्रासिंग पर गेटबूम तो लग है लेकिन आटोमेटिक नहीं है। संविदा पर तैनात कर्मचारी रस्सी के सहारे गेटबूम बंद कर ट्रेनों का संचालन करा रहे हैं। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी अकसर नदारद रहते हैं और क्रासिंग पर रेल संचालन भगवान भरोसे रहता है।

एआरटीओ प्रवर्तन ओपी राजपूत ने बताया कि परिवहन नियमों की अनदेखी करने और मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर लापरवाही बरतने वाले स्कूल वाहनों को बक्शा नहीं जाएगा। लगातार अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बताया कि रूटवार टीमें गठित कर चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
विज्ञापन

स्टेशन अधीक्षक विश्राम ने बताया कि उन्नाव रेलखंड में एक भी मानव रहित रेलवे क्रासिंग नहीं है। जिसकी रिपोर्ट उत्तर रेलवे महाप्रबंधक कार्यालय को भेजी जा चुकी है। मानव रहित रेलवे क्रासिंग मुरादाबाद मंडल व रायबरेली रेलखंड में है।
हादसे को न्यौता दे रहीं हैं 22 मानव रहित रेलवे क्रासिंग
- 15 मानव रहित रेलवे क्रासिंग उन्नाव-बीघापुर रेलमार्ग पर
- उन्नाव-बालामऊ रेलमार्ग पर रस्सी के सहारे गिराए जाते हैं बूम
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें