औरैया। गल्ला मंडी परिसर स्थित फल आढ़तियों की हालत खस्ताहाल है। बीस सालों से आढ़त का काम कर रहे व्यापारियों को मंडी प्रशासन से सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है। यहां तक की पिछले पंद्रह सालों से उन्हें जर्जर टीनशेड के नीचे व्यापार चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिससे उनमें मंडी प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।
आढ़तियों ने बताया कि उनकी आढ़तों के ऊपर लगी टीन शेड पिछले पंद्रह सालों से बुरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। टीनशेड टूटी होने पर बंदरों का आतंक झेलना पड़ता है। बारिश में भी नुकसान उठाना पड़ता है। मंडी प्रशासन से शिकायत के बावजूद नतीजा ढांक के तीन पात ही रहा।
फल के थोक व्यापारी वहीद कहते हैं की उनकी दुकान की टीन शेड पिछले दस सालों से टूटी फूटी पड़ी है। मंडी प्रशासन को लिखित देकर टूटी टीनशेड दुरुस्त कराने की मांग की पर कोई भी सुनने वाला नहीं।
दुकानदार पप्पू ने बताया कि मंडी प्रशासन की ओर से सालाना किया 24 सौ से बढ़ाकर 56 सौ रुपये कर दिया गया। जबकि, सुविधाओं के नाम पर कुछ न मिला। बरसात में पानी से फल खराब हो जाते हैं। जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
फलों के थोक व्यापारी सलीम ने बताया कि मंडी में बंदरों के आतंक के कारण आढ़तों में रखे फलों का जमकर नुकसान होता। लेकिन मंडी प्रशासन ने आज तक उनकी इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया।
- पंद्रह सालों से समस्या से जूझ रहे व्यापारी
- बढ़ा किराया पर नहीं हो रही सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो