कानपुर देहात। पढ़े भारत, बढ़े भारत अभियान के ट्विनिंग कार्यक्रम से परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्मार्ट बनाने की तैयारी है। सभी ब्लॉक से सर्वाधिक छात्र संख्या वाले एक एक स्कूल से दस-दस बच्चों को निजी, अर्द्धशासकीय स्कूलों में भेजकर स्मार्ट बनने के तौर तरीके सिखाए जाएंगे। स्मार्ट बनने के बाद ये छात्र-छात्राओं अपने स्कूल के अन्य साथियों को भी स्मार्ट बनाएंगे।
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्मार्ट बनाने के लिए पढ़े भारत, बढ़े भारत कार्यक्रम चलाया गया है। इसमें ट्विनिंग की कड़ी जोड़ी गई है। इसके तहत जिले के सरवनखेड़ा, अकबरपुर, मैथा, मलासा, अमरौधा, संदलपुर, डेरापुर, झींझक, रसूलाबाद, राजपुर समेत सभी दस ब्लाकों से एक-एक प्राथमिक स्कूल का चयन किया गया है। ब्लॉक में उसकी स्कूल को चुना गया है जिसमें बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। इन स्कूलों के 10-10 बच्चों का चयन अकादमिक प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। ट्विनिंग कार्यक्रम के तहत उन चयनित बच्चों को शहरी क्षेत्र के प्राइवेट व अर्द्धशासकीय या बेहतर संचालित विद्यालयों से जोड़ा जाएगा। जिससे वह दूसरे बच्चों के साथ जुड़कर वह शिक्षा व अन्य प्रकार का व्यवहारिक तरीका सीख कर अपने अंदर खुलापन ला सकें। चयनित बच्चों को निजी स्कूलों में भेजकर सप्ताह भर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिर वह बच्चे अपने स्कूल के बच्चों में बदलाव लाने की कवायद करेंगे। बीएसए संगीता सिंह ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों को ट्विनिंग को सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यक्रम में शामिल स्कूलों को नौ हजार रुपये का बजट दिया गया है। इस धनराशि से चयनित छात्रों के लिए हिंदी, गणित व अंग्रेजी विषय के लिए सौ-सौ पृष्ठ की तीन कापियां खरीदी जाएंगी। छोटे बच्चों के लिए सिलेट, चाक आदि की खरीद प्रबंध समिति की ओर से की जाएगी। वहीं चयनित ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों को शहरी जबकि शहरी क्षेत्र के स्कूल के बच्चों को ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों के अनुभवों को आपस में साझा करना है।
इस कार्यक्रम के ग्रामीण बच्चों को शिक्षित करने पर विशेष जोर है। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे शहरी क्षेत्र के बच्चों की अपेक्षा अधिक संकोची व व्यवहारिक रूप से खुले नहीं होते हैं जिससे सरकार का मकसद है कि ग्रामीण स्कूलों के बच्चे शहरी क्षेत्र के निजी स्कूलों में दस दिन जाकर वहां के बच्चों का व्यवहार देखेगें तो उनके अंदर भी बदलाव आएगा और यह बच्चे जब अपने स्कूल जाएंगे तो वहां के बच्चे इनका बदलाव देखकर खुद अपने व्यवहार में परिवर्तन करेंगे। वहीं पठन पाठन में भी सांमजस्य बैठाने की कोशिश की जाएगी।
सरवनखेड़ा के प्राथमिक स्कूल चिराना, संदलपुर का भंदेमऊ, रसूलाबाद का कहिंजरी, अकबरपुर का बहादुरपुर, राजपुर ब्लाक का प्राथमिक स्कूल राजपुर प्रथम, मलासा का पचलख, मैथा का बाघपुर प्रथम, झींझक का मनकापुर, डेरापुर का बलाई बड़ी, अमरौधा का सरायां को चयनित किया गया है। चयन का आधार सर्वाधिक छात्र संख्या है। दस वह स्कूल चयनित हुए हैं जहां छात्र संख्या सबसे अधिक है। चयनित स्कूलों में सौ से दो सौ बच्चे पंजीकृत हैं।
परिषदीय स्कूल के बच्चे बनेंगे स्मार्ट
ट्िविनिंग कार्यक्रम के तहत निजी, अर्द्धशासकीय स्कूल में दिलाया जाएगा प्रशिक्षण
क्रासर
सबसे अधिक छात्र संख्या वाले दस स्कूलों का किया गया चयन
दिनेश प्रताप सिंह गौरव