कन्नौज। एक्सप्रेस-वे पर खड़े जिस डंपर से कार टकराने के कारण भाजपा नेता सुब्रत पाठक के पिता ओमप्रकाश पाठक और फूफा महेश चंद्र दुबे की जान गई थी उस पर वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित नहीं है। जानलेवा हादसे का सबब बने डंपर की बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के हरियाणा से कन्नौज तक की दौड़ कायम रहना और कड़े सुरक्षा घेरे और निगरानी में रहने वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के टोल प्लाजा पार करते जाना सिस्टम पर बड़े और कड़े सवाल खड़े करता है। इससे यह भी साफ हो जाता है कि कन्नौज में एक्सप्रेस-वे पर रविवार तड़के यह हादसा न होता तो बिना नंबर प्लेट वाले डंपर में भरी मौरंग के नीचे छिपी अवैध शराब की बड़ी खेप आसानी से मंजिल तक पहुंच जाती।
हादसे के बाद मौके पर जुटी पुलिस ने जब मौरंग भरे लोडर को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की तो मौरंग के नीचे हरियाणा की अंग्रेजी शराब की 340 पेटी बरामद हुईं, जिनकी कीमत करीब 25 लाख रुपये आंकी गई। डंपर को कोतवाली लाकर इसके स्वामी और ड्राइवर तक पहुंचने की कोशिश की तो नंबर प्लेट न होने का राज खुला। इससे इतने लंबे रास्ते के बीच के टोल प्लाजा कर्मियों और चेकिंग स्टाफ की भूमिका सवालिया घेरे में आ गई है। साथ ही अवैध धंधेबाजों से मिलीभगत का शक भी गहरा गया है।
इस बाबत पूछने पर तिर्वा के कोतवाल आमोद कुमार ने बताया कि डंपर का चेसिस नंबर एआरटीओ को उपलब्ध कराते हुए उनकी मदद से डंपर मालिक व चालक तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह यादव ने डंपर की बेरोक-टोक दौड़ के सवाल पर जांच बाद कार्रवाई की बात कही है।
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