अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। मेरठ और इटावा में लाखों का छात्रवृत्ति घोटाला सामने आने पर ईओडब्लू (आर्थिक अपराध शाखा) जिले में भी जांच कर रही है। जांच टीम बीते सप्ताह परिषदीय स्कूलों के प्रधान शिक्षकों से वर्ष 2001 से 2010 के बीच स्कूलों में वितरण हुई छात्रवृत्ति का रिकॉर्ड ले गई है। एक अधिकारी के अनुसार शुरुआती जांच में कई स्कूलों में 2007 व 2008 की छात्रवृत्ति वितरण संबंधी अभिलेखों में गड़बड़ी मिली है।
प्रमुख सचिव गृह के निर्देश पर आर्थिक अपराध शाखा लखनऊ स्कूलों में बांटी गई छात्रवृत्ति का ब्योरा जुटा रही है। आर्थिक अपराध शाखा लखनऊ एसपी के निर्देश पर 11 सितंबर से 15 सितंबर के बीच ईओडब्लू के इंस्पेक्टर संजय सिंह की अगुवाई में टीम प्राथमिक व जूनियर स्कूलों के शिक्षकों से दस सालों का छात्रवृत्ति वितरण रिकार्ड कब्जे में लिया है। इसके अलावा शिक्षकों से एक कागज पर लिखित में वितरण संबंधी बयान के साथ ही ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारियों का ब्योरा साथ ले गई है।
इस तरह मिलती थी छात्रवृत्ति
विभागीय अधिकारियों के अनुसार सन् 2001 से 2010 के बीच अनसूचित जाति, ओबीसी, अल्पसंख्यक व सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं को पूर्व दशम छात्रवृत्ति बांटी गई। इस दौरान कक्षा पांच तक के छात्रों को 320 रुपये और कक्षा आठ तक के छात्रों को 480 रुपये और हाईस्कूल के छात्रों को 720 रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते थे।
-पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा 2001 से 2010 की कर रही जांच
-चार सदस्यीय टीम शिक्षकों से जमा कर चुकी है छात्रवृत्ति वितरण का ब्योरा