फर्रुखाबाद/अमृतपुर। विधायक अमृतपुर की शिकायत पर पूर्ति निरीक्षक के खिलाफ चल रही जांच में आखिरकार वह दोषी पाए ही गये। उप जिलाधिकारी ने पूर्ति निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को लिखा है। हालांकि पूर्ति निरीक्षक के खिलाफ ठंडे बस्ते में चल रही जांच को अमर उजाला ने भी समय-समय पर उठाया था।
20 फरवरी को अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने जिलाधिकारी मोनिका रानी से तहसील अमृतपुर के पूर्ति निरीक्षक देवी प्रसाद के खिलाफ कोटेदारों से धनउगाही करने का आरोप लगाते हुए जांच कराए जाने की मांग की थी। जिलाधिकारी ने जिलापूर्ति अधिकारी को जांच के आदेश दिए तो उन्होंने पूर्ति निरीक्षक अमृतपुर के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा था। तीन दिन में जब पूर्ति निरीक्षक ने जवाब नहीं दिया तो अमर उजाला ने डीएसओ से फिर जानकारी की तो पूर्ति निरीक्षक के हाईकोर्ट जाने की बात बताते हुए दो-तीन दिन में स्पष्टीकरण देने की बात कही। तीन दिन बाद जब फिर एसडीओ से अमर उजाला संवाददाता ने पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि पूर्ति निरीक्षक हाईकोर्ट गए हैं। दो-तीन दिन में आ जाएंगे। 14 दिन बीतने के बाद अमर उजाला संवाददाता ने जब फिर डीएसओ से जानकारी ली तो उन्होंने एसडीएम अमृतपुर पर मामला टाल दिया। एसडीएम अमृतपुर रमेशचंद्र यादव ने 15 मार्च तक पूर्ति निरीक्षक से स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट देने की बात कही थी। अमर उजाला की समय-समय पर मामले में प्रकाशित की गई खबरों को संज्ञान में लेते हुए एसडीएम ने गंभीरता से मामले की जांच करवाई। जांच में दोषी पाए जाने पर गुरुवार को एसडीएम ने पूर्ति निरीक्षक देवी प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेज दिया। एसडीएम अमृतपुर ने बताया कि जांच में पूर्ति निरीक्षक दोषी पाए गए हैं।
जांच में दोषी मिले पूर्ति निरीक्षक
एसडीएम ने जिलाधिकारी को कार्रवाई के लिए लिखा
अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने जिलाधिकारी से की थी शिकायत
अ-असर