अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। नवदुर्गा की चतुर्थी पर शहर के प्रमुख मंदिरों में मां कूष्मांडा के पूजन के लिए भक्ताें की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में देर रात तक भक्तों की कतारें लगी रहीं। माता फूलमती, मां सिंह वाहिनी, मां छेमकली, मकरंदनगर स्थित मां काली देवी व सरायमीरा के माता काली देवी दुर्गा मंदिर में शाम को महाआरती हुई।
पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि मां के कूष्मांडा स्वरूप के पूजन से यश व आयु में वृद्धि होती है। जटिल से जटिल रोगों से मुक्ति मिलती है। बताया कि जब ब्रह्मांड अस्तित्व में नहीं था। चारों ओर अंधकार ही अंधकार था, उस समय उन्होने महाशून्य में अपने मंद हास से उजाला करते हुए अंड की उत्पति की, जोकि बीज के रूप में ब्रह्म तत्व से मिला और ब्रह्मांड बना। वेदोें में मां को अजन्मा कहा गया है। जीवों में माता के स्थान को अनाहत चक्र में बताया गया है। माता का निवास स्थान सूर्य बताया गया है। वेदों में कहा गया कि सूर्य लोक में निवास करने की क्षमता सिर्फ माता कूष्मांडा में ही है।
स्कंद माता देतीं हैं संतान सुख का वरदान
कन्नौज। माता के पांचवे स्वरूप का नाम स्कंदमाता है। माता के इस स्वरूप की पूजा करने से भक्त को सुख-शांति, धन्य-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि देव सेनापति बनकर तारकासुर का वध करने व मयूर को वाहन के रुप में अपनाने वाले स्कंद की माता होने से उन्हे स्कंदमाता कहा जाता है।
या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता...
-नवरात्र के चौथे दिन भक्तों ने मां के कूष्मांडा स्वरूप का किया पूजन, मंदिरों में देर रात तक लगीं रहीं कतारें