डीसीपी मुख्यालय एसएम कासिम आबीदी ने बताया कि इनमें से लगभग 100 की प्रारंभिक जांच हो चुकी है। अगर इन पर आरोप सिद्ध होते हैं इनकी तीन वर्ष तक प्रोन्नति नहीं होगी, जबकि बाकी के 30 से 35 पुलिसकर्मियों को वृहद दंड मामले में डिमोट कर मूल पद पर भेजा जा सकता है।
वहीं, कई पुलिस कर्मियों पर पुलिस के रडार पर आए दीनू उपाध्याय से नजदीकी होने की बात सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दो एसीपी के अलावा तीन इंस्पेक्टर, सात दरोगाओं और कुछ सिपाहियों पर दीनू को संरक्षण देने या परोक्ष रूप से उसकी मदद कर साथ देने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एलआईयू भी उनके खिलाफ जांच कर रही है।
अधिवक्ता, कथित पत्रकारों पर नजर
दीनू उपाध्याय और उसके साथियों से संपर्क रखने वाले पुलिसकर्मियों के साथ ही पुलिस उसके करीबी अधिवक्ताओं व कथित पत्रकारों की भी सूची तैयार कर रही है। इसके अलावा उन अधिकारियों-कर्मचारियों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जो वर्तमान में दूसरे जिलों में हैं, लेकिन उनका दीनू से लगातार संपर्क था। इनमें कुछ आईपीएस अफसर भी शामिल हैं। दीनू के मामलों में इनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
दबिश के लिए बन रही नई रणनीति
दीनू के फरार साथियों की तलाश में जुटी पुलिस के लिए नवाबगंज चौकी इंचार्ज आदित्य बाजपेई और सिपाही विजयराज के वायरल वीडियो ने खासी किरकिरी कराई थी। वीडियो वायरल होने पर भले ही अधिकारियों ने चौकी इंचार्ज व सिपाही को निलंबित कर दिया लेकिन अब अधिकारी कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। आरोपियों के ठिकानों पर दबिश के लिए अब नई रणनीति तैयार की जा रही है।
कई पुलिसकर्मियों के दीनू और उसके साथियों से संपर्क में रहने व सांठगांठ की शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच कराई जा रही है। कुछ के थाना और चौकी क्षेत्र में जल्द ही बदलाव किया जाएगा। - आशुतोष कुमार, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर कानून एवं व्यवस्था