पानी का संचय नहीं हुआ तो होगा प्रलय
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा संचालित जल जीवन है अभियान के अन्तर्गत मानिकपुर ब्लॉक के इटवा-डुडैला गांव में कृषि एवं जल संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन के जागरुकता को लेकर चर्चा की गई। जगन्नाथपुरम गंाव में नाबार्ड द्वारा सहायतित व संस्थान द्वारा संचालित टिकाऊ विकास परियोजना (एसडीपी) का लोकार्पण भी किया गया।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)उप्र. के मुख्य महाप्रबंधक एके पांडा ने कहा कि जल, हवा, पर्यावरण हमें मुफ्त में प्राप्त है। जिस दिन इनकी कीमत का मूल्य आंका जाएगा, सम्पूर्ण जीवन में भी इनके ऋ ण को चुका नहीं पाएंगे। विश्व में जीवन की शुरुआत एवं प्रलय दोनों जल से ही है। जल का महत्व न सिर्फ दैनिक जीवन में, बल्कि कृषि एवं औद्योगिक विकास के साथ-हर पल, हर क्षण सतत रूप से जरुरी है।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के जीआईएस. विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि जल का एक मात्र श्रोत वर्षा जल ही है। हमारे भूमिगत जल में जितने मिनरल्स हैं उतने बाजार से खरीदने वाले पानी में नहीं अत: भूमिगत जल को बचाने के लिए हमें एक-ंएक बूंद के महत्व को समझना होगा। जल संवाद कार्यशाला में जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड बांदा-ंचित्रकूट भोलाप्रसाद सिंह ने कहा कि आने वाले बरसात के पानी को सहेजने का काम जल जीवन है कार्यशाला में एजीएम नाबार्ड के पहाड़ सिंह, डॉ. राजेश सिंहा, महाप्रबंधक इलाहाबाद उप्रग्रामीण बैंक अशोक सरकार, महाप्रबंधक जिला कोऑपरेटिव बैंक आलोक श्रीवास्तव, अग्रणी जिला प्रबंधक अभिनंदन कुमार, जिला कोऑपरेटिव बैंक के उप महाप्रबंधक विनोद मिश्रा तथा कार्यशाला में इटवां-ंडुडैला, छोटी पाटिन,बड़ी पाटिन, बगरहा, आदि गांवों के ग्रामीण मौजूद रहे।
कृषि एवं जल संरक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन