कानपुर देहात। आश्रय स्थल में बंद मवेशियों के भरण-पोषण में प्रतिदिन 30 रुपये खर्च किए जा सकेंगे। शासन ने निर्देश जारी कर दिया है। वहीं, मवेशियों की देखरेख के लिए रखे गए प्रति मजदूर को दो हजार रुपये अलग से दिए जाएंगे। बड़ी बात यह है कि जिम्मेदारों के लिए इतनी धनराशि से व्यवस्था करना आसान नहीं है।
भूसे के दाम आसमान छू रहे हैं। जिले में भूसा एक हजार रुपये क्विंटल तक पहुंच गया है। जिससे आश्रय स्थलों में बंद मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करने में जिम्मेदारों को पसीना आ रहा है। वहीं, शासन ने आश्रय स्थल में बंद मवेशियों के भरण पोषण के लिए गाइड लाइन जारी कर दी है। जिसके मुताबिक प्रत्येक मवेशी के भरण पोषण पर प्रतिदिन 30 रुपये खर्च करने हैं। यह धनराशि छोटे-बड़े दोनो प्रकार के मवेशियों के लिए समान होगी। सरकार का मानना है कि छोटे मवेशी कम चारा खाएंगे और बड़े ज्यादा खाएंगे जिससे औसत में तीस रुपये दिए जाने से पूर्ति हो जाएगी। वहीं बात करें बाजार में चारे की स्थिति पर तो तीस रुपये में केवल तीन किलोग्राम भूसा मिलेगा। पशु चिकित्सकों के मुताबिक तीन किलोग्राम भूसा छोटे मवेशी ही खा जाएंगे जबकि बड़े मवेशियों के लिए कम से कम छह से सात किलोग्राम भूसा चाहिए। उनके चारे के लिए 70 रुपये का तो केवल भूसा ही चाहिए और उसमें खली व दाना कहां से आएगा।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. डीसी अग्रवाल ने कहा कि प्रत्येक मवेशी के लिए प्रतिदिन तीस रुपये के हिसाब से खर्च करने की सूचना गोवंश आश्रय स्थल की समितियों को दे दी गई है। निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार ही व्यवस्था करनी है।