बांदा। जेल की कैंटीनों में बंदियों को पकवान परोसने पर रोक लगा दी गई है। अब कैंटीन में छोला-भटूरा, ब्रेड पकौड़ा और मिठाई नहीं मिलेगी। केवल 20 प्रकार के चुनिंदा सील पैक खाद्य वस्तुएं ही बेची जाएंगी।
जेलों की कैंटीनों में अभी समोसा, ब्रेड पकौडा, छोला भटूरा, पूड़ी, पराठा, मिठाई समेत 33 प्रकार की खाद्य व जनरल मर्चेंट का सामान बेचा जाता था। अनियमितताओं की शिकायतों के बाद शासन ने 13 तरह के पकवानों पर रोक लगा दी है।
कैंटीन में अब सिर्फ 20 तरह के पैक्ड सामान जैसे दूध, क्त्रस्ीम, मट्ठा, बिस्किट, वाशिंग पाउडर, नमकीन, टूथ ब्रश, अचार, साबुन, सरसों तेल, आंवला तेल, चना, चाय, अंडरवियर, बनियान, मोजा, चप्पल, गमछा, तौलिया, बूट पालिश, मच्छर निरोधक क्वाइल आदि ही बेचा जाएगा। डिप्टी जेलर तारकेश्वर सिंह ने बताया कि शासन के आदेश पर प्रतिबंधित सामान की बिक्त्रस्ी पर रोक लगा दी गई है। कैंटीन से सिर्फ पैक्ड सामान ही बेचा जा रहा है।
कैंटीन में रोजाना दो हजार का कारोबार
जेल कैंटीन में प्रतिदिन चार से पांच हजार की बिक्त्रस्ी होती है। पूर्व में बिक्त्रस्ी का ग्राफ इससे कहीं ज्यादा था लेकिन हाल ही में करीब 600 बंदियों के चित्रकूट जेल में शिफ्ट कर दिए जाने के बाद यह बिक्त्रस्ी आधी रही गई है।
नाम बंदी का, काम कर्मचारियों का
जेल मैन्युअल के अनुसार कैंटीन का संचालन बंदी कर सकते हैं लेकिन बंदी कैंटीन चलाने का पैसा नहीं जुटा पाते हैं। ऐसे में कैंटीन का संचालन कागजों पर बंदी और वास्तविकता में सिपाही करते हैं। इससे होने वाली आमदनी सरकारी कोष में जमा होती है। इस आमदनी को शासन जेल की व्यवस्थाओं और बंदियों की भलाई पर खर्च करता है।