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जांच चल रही, रिकार्ड का पता नहीं

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अमर उजाला ब्यूरो
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फर्रुखाबाद। मैनपुरी में स्लीपर बस पलटने से 17 की मौत और 25 से अधिक यात्रियों के घायल होने के बाद अवैध बसों की शुरू हुई जांच मजाक बन कर रह गई है। जांच चल रही है, लेकिन रिकार्ड का पता नहीं। डीएम की ओर से गठित जांच टीम के अधिकारी दूसरे जिलों से आने वाली बसों को पकड़ कर खाना पूरी कर रहे हैं। जांच होते करीब पांच दिन हो गए हैं, अभी तक टीम के अफसरों को यह तक नहीं पता कि शहर में कितनी ट्रैवल्स एजेंसी और उनके पास कितनी बसें हैं।

शहर निवासी विमल चतुर्वेदी की पत्नी के नाम संचालित स्लीपर बस एक सप्ताह पूर्व जयपुर से फर्रुखाबाद आते समय मैनपुरी में पलट गई थी। दुघर्टनाग्रस्त बस सीटिंग में पंजीकृत थी, जिसको स्लीपर बनाकर चलाया जा रहा था। डीएम ने संचालित हो रही अवैध बसों को पकड़ने के लिए टीम का गठन किया। इसमें नगर मजिस्ट्रेट, सीओ और प्रभारी एआरटीओ को रखा गया। जांच शुरू हुए करीब पांच दिन हो चुके हैं। अभी तक टीम ने 15 बसें पकड़ी हैं। इनमें तीन बसें मंगलवार की रात को पकड़ी गईं। इन बसों में अधिकतर बसें दूसरे जिलों से शहर में आने वाली हैं। शहर में खुली ट्रैवल्स एजेंसी की एक बस पकड़ी गई है।
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शहर के लालदरवाजे से कादरी गेट चौकी तक कई ट्रैवल्स एजेंसी खुली हैं। जिनकी सीटिंग और स्लीपर बसें चलती हैं। जांच टीम के अधिकारी हादसा ग्रस्त बस की मालकिन व अन्य अवैध तरीके से बसें चलवाने वाले ट्रैवल्स एजेंसियों के संचालकों को बचाने में जुटे हैं। इस कारण किसी भी ट्रैवल्स एजेंसी की अभी तक जांच पड़ताल नहीं की गई।

यहां तक कि टीम के अफसरों को यह तक नहीं पता कि शहर में कितनी ट्रैवल्स एजेंसी हैं और उनके पास कितनी बसें व छोटे वाहन हैं। जिस कारण ट्रैवल्स एजेंसी संचालक सीटिंग में पंजीकृत बसों को स्लीपर बनाकर धड़ल्ले से चला रहे है।

सत्ता पक्ष के नेता भी बचाव में जुटे
मैनपुरी में हादसा ग्रस्त बस की मालकिन और उनके पति को बचाने में जिले के एक सत्ताधारी विधायक भी पैरवी में लगे हैं। बस मालकिन के पति विमल चतुर्वेदी के सत्ताधारी नेता से अच्छे संपर्क हैं। इस कारण प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे हट रहे हैं।

शहर में कितनी ट्रैवल्स एजेंसी हैं और उनके पास कितनी बसें किस प्रकार की हैं, इसकी जानकारी नहीं है। इसका रिकार्ड एआरटीओ से निकवाया जाएगा। छापामार कर बसों को पकड़ने के बाद उनके अभिलेख चेक किए जाते हैं। जिनके अभिलेख गलत मिलते हैं, उनका चालान कर दिया जाता है। - जैनेंद्र कुमार जैन, नगर मजिस्ट्रेट
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शहर में संचालित ट्रैवल्स एजेंसी और उनकी बसों की जानकारी नहीं है। कार्यालय का नेट खराब चल रहा था। इस कारण कोई रिपोर्ट नहीं है। अब नेट शुरू हुआ है। इसका डाटा देखा जाएगा। वीके आनंद, प्रभारी एआरटीओ
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