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Kanpur News: सीएसजेएमयू में एआई मंथन से निकले 14 टोकन वर्ड

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कानपुर। समुद्र मंथन के 14 रत्नों की तरह सीएसजेएमयू में हुए ‘एआई मंथन 2.0’ से भी भविष्य की तकनीक और उसके इस्तेमाल को लेकर 14 महत्वपूर्ण टोकन वर्ड निकले हैं। इन 14 टोकन वर्ड को महत्वपूर्ण बिंदु मानकर काम किया जाएगा। यह बात राज्यपाल के ओएसडी सुधीर एम बोबडे ने कही।
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उन्होंने कहा कि एआई मंथन 2.0 से पहला शब्द ‘1.0’ निकला। यह मौजूदा स्थिति और आगे बढ़ने की जरूरत का संकेत देता है। दूसरा शब्द रिसर्च, तीसरा मल्टी डिसिप्लिनरी और चौथा मल्टी मॉडल डेटा रहा। एआई किसी एक विषय तक सीमित नहीं है, इसलिए अलग-अलग विधाओं को जोड़ना जरूरी है।
पांचवां टोकन वर्ड इनोवेशन और छठा ट्रांसलेशनल लैब्स निकला। ट्रांसलेशनल लैब्स को शोध और उसके व्यावहारिक उपयोग के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया। सातवां शब्द एलएलएम (लार्ज लैंग्वेज मॉडल) और आठवां लोकल रहा।
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इसके बाद सेक्टर स्पेसिफिक स्मॉल लैंग्वेज मॉडल को नौवें महत्वपूर्ण शब्द के रूप में रखा गया। उन्होंने दसवां शब्द स्केल बताया। कहा कि एआई समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने की क्षमता विकसित करना जरूरी है। 11वां शब्द 5.0 रहा। यह इंडस्ट्री और एग्रीकल्चर समेत विभिन्न क्षेत्रों में मानव और तकनीक के बेहतर तालमेल की ओर संकेत करता है। 12वां शब्द ह्यूमन इन लूप रहा। राज्यपाल के ओएसडी ने कहा कि एआई को पूरी तरह अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, उसमें मानवीय निगरानी और निर्णय की भूमिका जरूरी है। 13वां शब्द सॉवरेन बताया गया, जो एआई के क्षेत्र में नीति और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। 14वें और सबसे महत्वपूर्ण ‘अमृत’ के रूप में ‘एआई एज असिस्टेंट’ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एआई को मास्टर नहीं बनाया जा सकता। इसे असिस्टेंट या सहयोगी के रूप में इस्तेमाल करना होगा। मानव को निर्णय प्रक्रिया में अपनी भूमिका बनाए रखनी होगी।
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