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तीन साल से लापता बर्खास्त सिपाही इटावा से गिरफ्तार

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उन्नाव। तीन साल पहले जिला पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान राइफल लेकर सिपाही बिना बताए लापता हो गया। बाद में मुकदमा दर्ज होने पर वो राइफल थाने में डालकर फिर भाग निकला। इसके तीन साल बाद मंगलवार को आरोपी बर्खास्त सिपाही को पुलिस ने इटावा से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस हिरासत में आरोपी ने बताया कि बेटे का एक्सीडेंट होने पर उसने छुट्टी मांगी थी। इसके बावजूद चुनाव ड्यूटी के दौरान उसे छुट्टी नहीं मिली थी। जिसके कारण वो बिना बताए वो घर चला गया। जबकि अधिकारियों ने उसको लापता रहने पर बर्खास्त कर दिया था।
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इटावा के थाना जसवंतनगर के गांव नगला सियमरा निवासी संतोष कुमार वर्ष 2015 में उन्नाव के गंगाघाट थाने में सिपाही के पद पर तैनात था। उस समय हुए जिला पंचायत चुनावों में ड्यूटी के दौरान वो बिना सूचना राइफल सहित लापता हो गया। उसके वापस न लौटने और सरकारी राइफल जमा न करने पर तत्कालीन आर्मरर रणजीत मिश्रा ने शहर कोतवाली में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि कई दिनों बाद संतोष कुमार गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस लाइन में रायफल फेंक कर भाग गया । इसके बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। तीन साल पुराने मामले में एसपी हरीश कुमार के निर्देेश पर सदर चौकी इंचार्ज शालिनी सहाय ने उसे इटावा के जसवंत नगर स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया है। वैसे संतोष के खिलाफ इटावा के चौबिया थाने में भी आपराधिक मुकदमा दर्ज है। पुलिस उसका भी पता लगा रही है। वहीं, आरोपी संतोष का कहना है कि तीन साल पहले वह ड्यूटी पर पहुंचा था । इसी दौरान सड़क हादसे में बेटे के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना परिजनों ने भेजी। इसके बाद उसने छुट्टी मांगी पर अवकाश मंजूर नहीं हुआ। जिसके बाद वो बिना अवकाश के ही अपने घर चला गया। संतोष का कहना है कि उसका बेटा अभी तक ठीक नहीं हो पाया है। बर्खास्त सिपाही संतोष कुमार पाल के खिलाफ वर्ष 2015 से मामला पंजीकृत है। इस दौरान किसी ने इसकी विवेचना में दिलचस्पी नहीं ली। एसपी हरीश कुमार के चार्ज लेने के बाद मामले में तेजी आई।
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