अमर उजाला ब्यूरो
उरई। डायलिसिस के लिए मरीजों को अब जिले से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें अब यह सुविधा यही जिला अस्पताल में ही उपलब्ध हो सकेगी। इसके लिए जिला अस्पताल में पुराने सीएमएसडी स्टोर भवन को चिन्हित किया गया है।
डायलिसिस वार्ड के लिए अलग से बिजली की व्यवस्था भी की जा रही है। फिटिंग का काम तेजी से चल रहा है। इसके पूरा होते ही मशीनें भी आनी शुरू हो जाएंगी। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल के अंत तक सुविधा उपलब्ध भी होने लगेगी। सीएमएस एके सक्सेना ने बताया कि काफी समय से जिले में डायलिसिस सुविधा की मांग की जा रही थी। इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था, जिसे मंजूरी दे दी गई है। सुविधा शुरू होने से किडनी के मरीजों को अब शहर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
जिला अस्पताल के पूर्व प्रभारी अधिकारी डॉ. सुशील कुमार द्विवेदी ने बताया कि जब किडनी की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है, शरीर के विषैले पदार्थ पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाते। क्रिटनिन और यूरिया जैसे पदार्थों की शरीर में अधिकता हो जाती है तो मशीनों की सहायता से रक्त को साफ किया जाता है। इस प्रक्रि या को डायलिसिस कहते है। डायलिसिस दो प्रकार का होता है। पहली हीमो डायलिसिस होता है। दूसरी प्रक्रिया पेरिटोनियल डायलिसिस होती है, जिसमें मरीज की नाभि के नीचे आपरेशन से एक नली डाली जाती है। यही सुविधा जिला अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो डायलिसिस के लिए शासन ने करीब 80 लाख से एक करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है। इसमें वार्ड का रखरखाव, मशीनें और अतिरिक्त स्टाफ का खर्च भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब ढाई से तीन हजार मरीज डायलेसिस की सुविधा के लिए झांसी और कानपुर जाते हैं। जिले के नर्सिंगहोम में भी यह सुविधा मौजूद नही ंहै। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सीएमएस ने बताया कि अस्पताल में एक बार में 10 मरीजों का डायलिसिस किया जा सकेगा। इसके लिए शासन से मशीनें तो आएंगी ही, कर्मचारियों की तैनाती भी जल्द की जाएगी।
-मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा झांसी-कानपुर