अधिकारी छोड़ देते हैं तेंदुए-बाघ
इनकी मौतें किन्हीं न किन्हीं कारणों से होती रही है। कभी करंट से कभी शिकार से तो कभी ट्रेन की चपेट में आने से इनकी मौतें हो चुकी हैं। रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में घना जंगल होने के कारण जब कभी तेंदुए- बाघ किसी अन्य जिलें मे पाए जाते हैं, तो उन्हें यहां पर वन विभाग के अधिकारियों द्वारा छोड़ दिए जाते है।
जंगल में मिलते रहते हैं शव
इनकी सुरक्षा सही ढंग से न करने से इनकी मौते होती रहती हैं। चार साल पहले गढचपा के जंगल में एक तेंदुआ का शिकारियों ने मार दिया था। इसके बाद निहीं के जंगल में तेंदुआ का शिकार किया गया। इसी तरह से जंगल में शव में मिलते रहे हैं।
रेल अधिकारियों को लिखा गया है पत्र
रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के उप निदेशक पीके त्रिपाठी ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 60 नर मादा तेंदुआ व बाघ हैं। इनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाते हैं। वन क्षेत्र से गुजरी रेल लाइन से कॉशन पर ट्रेनें गुजारने के लिए रेल अधिकारियों को पत्र लिखा जाता है।
शिकार करने के आरोप में 10 लोग हुए हैं गिरफ्तार
लगातार तेंदुआ व बाघों को बचाने के लिए जंगलों में कैमरे भी लगाए गए हैं। इनकी लोकेशन की जानकारी के लिए संकेतक लगाए जाते हैं। जब भी ऐसे किसी वन्य जीव प्राणी का शिकार करने की जानकारी होती है, तो इस पर प्रभावी कार्यवाही होती है। तीन साल में दस से अधिक लोगों को शिकार करने के आरोप में पकड़ा गया है।