कानपुर देहात के संदलपुर ब्लॉक के दो पोल्ट्री फार्म में तीन दिन में 118 चूजों की मौत हो चुकी है। फार्म संचालकों ने चूजों को गड्ढों में दफना दिया है। पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं है। खास बात यह है कि जिन पोल्ट्री फार्मों में चूजों की मौत हुई है, वहां मुर्गे धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं।
मामले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि दफनाए गए चूजों को निकलवाकर जांच कराई जाएगी। बिना पंजीकरण संचालित पोल्ट्री फार्म में मुर्गों व चूजों की मौत की खबर प्रशासन तक नहीं पहुंच रही है। सुमेरपुरवा के पोल्ट्री फार्म संचालक श्रीकृष्ण पाल ने बताया कि उनके पास 1042 चूजे थे। 44 चूजों की सर्दी लगने से मौत हुई है। अकना के पोल्ट्री फार्म संचालक सुघर सिंह ने बताया कि उनके फार्म में 482 चूजे थे, 74 की मौत हुई। संचालकों का कहना है कि चूजों की मौत करीब एक सप्ताह पहले हुई थी।
बिना पंजीयन के पोल्ट्री फार्म बने सिरदर्द
ग्रामीण क्षेत्रों में कई पोल्ट्री फार्म बिना पंजीकरण चल रहे हैं। विभाग के पास उनका कोई आंकड़ा नहीं है। संदलपुर ब्लॉक के दशहरी, पिंडार्थू, पल्हनापुर, हरपुरा, खानपुर, डिलवल आदि गांवों में पोल्ट्री फार्म संचालित हैं। पशुधन अधिकारी संदलपुर देवेंद्र सचान ने बताया कि पोल्ट्री फार्म का पंजीकरण नहीं है।
दो पोल्ट्री फार्म में चूजों की मौत की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। चूजों को गड्ढों से निकलवाकर परीक्षण कराया जाएगा। सूचना न देने वाले पोल्ट्री फार्म संचालकों पर कड़ी कार्रवाई होगी। - डॉ. देवकी नंदन लवानिया, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी