अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। किसानों को चाहिए कि अपनी मूल आवश्यकता के अनुरूप खेत को डिजाइन करें। तभी वह समृद्ध होंगे। यह बात यहां ग्राम समृद्धि परियोजना के अंतर्गत फतेहपुर से यहां ट्रेनिंग लेने आए 44 किसानों के जत्थे को बताई गई।
बुधवार को प्रशिक्षण के दौरान प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिक उत्पादन के लिए तरह-तरह की विधियां अपनाने की सीख देना है। किसान को यह समझना होगा कि खेती क्या है? वह खेती क्यों करता है? खेती को बोझ मान लेने से सिर्फ अपनी नैतिक जिम्मेदारी ही अपनाएगा। कहा कि किसान को प्रकृति की मार, बाजार की चालाकी, सरकार की नीतियां आदि से जूझना पड़ता है।
उन्होंने ट्रेनिंग ले रहे किसानों को स्थानीय सूक्ष्म जीवों की भूमिका के बारे में बताया। कैल्शियम, नाइट्रोजन, पोटास और पौधों के ग्रोथ हेल्थ टानिक आदि बनाने की जानकारी दी। प्रशिक्षक शैलेंद्र सिंह बुंदेला ने कंपोस्ट एवं श्रीवास खाद बनाने की तरकीब बताई। इसमें बाजार से खरीदने की कोई वस्तु नहीं है।
किसान पुष्पेंद्र भाई ने फार्म डिजाइनिंग की जानकारी दी। बताया कि एक तिहाई में वन व बाग और दूसरी तिहाई में पशुओं के लिए चारागाह, तिसरी तिहाई में जरूरत के अनुरूप फसल उत्पादन और 10वां हिस्सा पानी प्रबंधन होना चाहिए। मुर्गी पालन, बकरी पालन आदि का भी प्रशिक्षण दिया। यह प्रशिक्षण बड़ोखर खुर्द स्थित ह्यूमन एग्रेरियन सेंटर में एचडीएफसी बैंक एवं श्रमिक भारतीय के सहयोग से चल रहा है। फतेहपुर के जितेंद्र, रज्जू कुशवाहा, लाल खां, पंकज बागवान, प्रभाकर तिवारी आदि उपस्थित रहे।
फतेहपुर के 44 किसान बांदा में ले रहे ट्रेनिंग
ग्राम समृद्धि परियोजना के तहत प्रशिक्षण