उन्नाव। बुखार से अधेड़ की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव से अस्पताल में डायरिया पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है। डायरिया से सबसे ज्यादा छोटे बच्चे प्रभावित हैं।
सोहरामऊ के जैतीपुर में रहने वाले राजाराम को मंगलवार दोपहर तेज बुखार आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान राजाराम की मौत हो गई। मौसम में लगातार परिवर्तन से लोग बेहाल हैं। रोज बढ़ते तापमान से संक्रामक रोग का हमला तेज हो गया है।
नतीजतन सरकारी व प्राईवेट अस्पताल में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सबसे अधिक छोटे बच्चे इस बीमारी का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन व बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं आम दिनों में उनके पास डायरिया के मात्र दस से बीस फ ीसदी मरीज ही आते थे, लेकिन जैसे ही गर्मी शबाब पर पहुंची तो डायरिया के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोत्तरी हो जाती है।
दिन भर की ओपीडी में आने वाले मरीजों में केवल 60 फीसदी मरीज डायरिया के ही होते हैं। जिसमें अधिकतर तो हालत बिगड़ने के बाद ही अस्पताल की ओर रुख करते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, डायरिया के केस बढ़ने की मुख्य वजह अधिक तापमान है।
बुधवार को जिला अस्पताल में डायरिया से पीड़ित होने पर मोनी (16) पुत्री गंगाराम निवासी केसरगंज, अनीता पुत्री आशीष निवासी एबी नगर, महिंदर कुमार (43) पुत्र बेचेलाल निवासी बीघापुर, संजय सिंह (35) पुत्र ज्ञानवीर निवासी शिवकुमार, कमलेश पुत्र गुरु प्रसाद निवासी इब्राहिमबाग और कृष्णा पुत्र राम सजीवन निवासी शांतीनगर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हाथ धोने में न बरतें लापरवाही
उन्नाव। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. शोभित अग्निहोत्री ने बताया सफ ाई की कमी से रोग तेजी से फैलता है। आम तौर पर लोग हाथ धोने में लापरवाही करते हैं। वह सिर्फ हाथ पर पानी डालकर निकल जाते हैं। ऐसे में वायरस और बैक्टीरिया हाथों में ही रह जाते हैं। इस बीच खाना खाते समय वह हाथों के जरिये आंतों तक पहुंच जाते हैं।
जिंक ओआरएस का घोल वरदान
उन्नाव। डायरिया की चपेट में आने वाले मरीज के लिए जिंक व ओआरएस का घोल किसी वरदान से कम नहीं है। चिकित्सकों की मानें तो डायरिया से पीड़ित मरीज को डी हाईड्रेशन की शिकायत होती है। ऐसे में जिंक व ओआरएस का घोल शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। चिकित्सकों के अनुसार, शरीर में एंटीबाडीज होती हैं जो इन वायरस से लड़ने के लिए काफ ी है। ऐसे में डायरिया से पीड़ित होने पर एंटीबायोटिक खाने के सिर्फ जिंक और ओआरएस लें।
ऐसे करें बचाव
उन्नाव। जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉ. आशीष श्रीवास्तव बताते हैं कि हमारी सावधानी इस रोग से बचा सकती है। वह बताते हैं कि हाईजीन मेनटेन रखने, खुले खाने का इस्तेमाल न करें, अधिक समय तक रखें खाने से परहेज करें, साफ पानी पिए और डायरिया होने पर ओआरएस का घोल और जिंक लेते रहे।
वार्ड के कूलर की मोटरख् ट्रामा सेंटर का एसी फुंका
उन्नाव। भीषण गर्मी में जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों का बुरा हाल है। गर्मी से राहत देने के लिए वार्ड में लगाए गए कूलर में से अधिकतर की मोटर खराब हो गई है। ऐसे में मरीजों को कूलर की गर्म हवा के भरोसे ही रहना पड़ रहा है। वहीं कई दिनों से ट्रामा सेंटर के एक्सरे रूम में लगा एसी भी खराब है।
ऐसे में यहां आने वाले मरीज गर्मी से बेहाल नजर आते हैं। एक्सरे के लिए गैलरी में अपनी बारी का इंतजार करने वाले मरीजों के लिए यहां पंखे भी नहीं लगे हैं। सीएमएस डा. एसपी चौधरी ने बताया जल्द ही कूलर की मोटर बदलवाने के साथ ही खराब एसी को भी ठीक कराया जाएगा।
-मौसम में लगातार उतार चढ़ाव से अस्पताल में बढ़े डायरिया के मरीज
-डायरिया से सबसे अधिक छोटे बच्चे प्रभावित, बढ़ रहे मरीज