कानपुर देहात में 50 बीघे में बनाए गए असालतगंज के गो-आश्रय स्थल में 391 गोवंश बंद किए गए थे। इनकी देखभाल के लिए लक्ष्मी नरायण, राजकिशोर, दिनेश, कमलेश समेत आठ कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये कर्मचारी आश्रय स्थल में सुविधाएं न होने की सही रिपोर्ट अधिकारियों को नहीं दे रहे हैं।
मवेशियों को आसपास के खेतों से मंगाकर लाही का सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। लाही का भूसा खाने के बाद मवेशियों को प्यास ज्यादा लगती है। छाया न होने से दोपहर की तेज धूप में मवेशी गर्मी में बिलबिले रहते हैं। पर्याप्त पानी न मिलने से मवेशियों की तबियत बिगड़ गई।
इसकी सूचना भी कर्मचारियों ने समय पर अधिकारियों को नहीं दी। दो दिन में (शुक्रवार व शनिवार)11 मवेशियों की मौत के बाद अधिकारियों को सूचना दी गई। एसडीएम जेपी पांडेय पांच और पशु चिकित्साधिकारी रसूलाबाद -डॉ. गीतम सिंह मृत मवेशियों की संख्या भी अलग अलग बता रहे हैं।
इससे साबित होता है कि आश्रय स्थलों में बंद मवेशियों के प्रति आलाधिकारी भी लापरवाही बरत रहे हैं। मवेशियों की मौत होने के बाद एसडीएम कह रहे हैं कि छाया के लिए जल्द ही टीन शेड का निर्माण कराया जाएगा। ग्राम प्रधान मुमताज अहमद भोला चारा तथा पानी की पर्याप्त व्यवस्था का दावा कर छाया की व्यवस्था कराने की बात कह रहे हैं। एसडीएम ने ये भी कहा कि मवेशियों की मौत बीमारी से हुई है लेकिन क्या बीमारी थी ये नहीं बता सके। डॉ गीतम सिंह लाही का भूसा खाने से मवेशियों के लीवर को नुकसान पहुंचने और गर्मी से मौत होना बताया है।