मल्लावां (हरदोई)। 29 अप्रैल को हरदोई और मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र के लिए मतदान होगा। मतदाताओं को रिझाने के लिए जनसभाओं, जनसंपर्क और नुक्कड़ सभाओं का दौर हर तरफ दिख रहा है। नहीं दिख रहे हैं तो इलाके के अहम मुद्दे। दरअसल हर वर्ष गंगा में उफान के कारण आने वाली बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। नुकसान की भरपाई तो दूर की कौड़ी है, कटान में घर और मकान गंवाने वालों को एक अदद छत तक नहीं मिल सकी। अब चुनाव करीब है तो गंगा किनारे बसे मल्लावां विकास खंड के ग्राम माहिमपुर के लोगों की टीस फिर उभरकर सामने आ रही है। उनका कहना है कि नेता जनसंपर्क तो कर रहे हैं लेकिन बाढ़ का दंश झेल रहे लोगों का हाल कोई नहीं पूछ रहा।
ग्राम माहिमपुर के खेत और मकान गंगा का जलस्तर बढ़ते ही नदी में समाने लगते हैं। जलस्तर बढ़ते ही यहां के बाशिंदों की धुकधुकी भी बढ़ती है। बाढ़ के समय आश्वासनों की झोली भरकर आने वाले नेता और अफसर पानी उतरने के बाद नहीं दिखते। चुनावी बेला में जरूर अब आश्वासनों की पोटली लेकर नेता जनता के बीच पहुंच रहे हैं।
माहिमपुर निवासी 75 वर्ष की रामदेवी कहती हैं कि कोई सुनवाई नहीं होती। चुनाव आए हैं तो नेता भी आ रहे हैं। घासफूस से बनी झोपड़ी की ओर इशारा कर रामदेवी बताती हैं कि न तो प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला और न ही राशन कार्ड। 75 साल उम्र है लेकिन पेंशन भी नहीं मिल रही। पति रामप्रसाद की मौत 20 वर्ष पहले हो चुकी है और कोई पुत्र नहीं है।
गांव निवासी 88 वर्ष की रामदुलारी कहती हैं कि अभी तक इस इलाके में कोई मदद नहीं मिली। पेंशन मिलने की बात से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि इसी झोपड़ी में गुजर बसर हो जाती है।
70 वर्ष की फुल्लो की हकीकत भी कुछ ऐसी ही है। झोपड़ी के नीचे गुजर-बसर हो जाती है। पेंशन योजनाओं का लाभ फुल्लो को कभी नहीं मिला और उनके नाम से अगर किसी और को पेंशन जा रही है तो इसकी जानकारी फुल्लो को नहीं है।
45 वर्ष के सियाराम भी बाढ़ प्रभावित माहिमपुर में झोपड़ी के नीचे गुजर-बसर करते हैं, लेकिन अब तक उनको भी किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला।