मूसानगर। छोटी गया के नाम से प्रसिद्ध कस्बे के देवयानी सरोवर में पिंडदान करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है। यहां पर प्रथम पिंड दान का खास महत्व है। पितृ पक्ष आरंभ होने पर गया, बिहार जाने से पहले यहां पर प्रथम पिंडदान किया जाता है। जिसमें विधि-विधान से पितरों के तर्पण हेतु पूजन-पाठ करते हैं।
कस्बा स्थित देवयानी सरोवर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि सरोवर में श्राद्ध किए बगैर गया में श्राद्ध का फल पूरा नहीं होता है। बीते 24 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो गए थे। धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा यायाति ने देवयानी सरोवर का निर्माण कराया था। पंडित मुन्ना लाल शास्त्री ने बताया कि एक समय दैत्यराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिठा व दैत्य गुरु शुक्त्रसचार्य की पुत्री देवयानी जंगल में घूमने गए थे। घने जंगल के बीच में स्थित सरोवर को देखकर दोनों स्नान करने लगे थे। इसी बीच भगवान शंकर को आते देख देवयानी ने राजा की पुत्री शर्मिठा के वस्त्र पहन लिए थे। जिससे गुस्से में आकर शर्मिठा ने देवयानी को कुएं में धक्का दे दिया। वहीं इसी दौरान कुएं के पास से गुजर रहे जाजमऊ के राजा यायाति ने पुकार सुनकर देवयानी को कुएं से बाहर निकाला । इसके बाद दैत्य गुरु शुक्त्रसचार्य ने देवयानी का विवाह राजा यायाति से कर दिया। शुक्त्रसचार्य ने नाराजगी जताते हुए वृषपर्वा से जाने के लिए कहा लेकिन राजा यायाति के अनुनय पर दैत्यराज की पुत्री शर्मिठा को देवयानी की दासी बनाने की शर्त मान गए। इसके बाद राजा यायाति ने उसी सरोवर का भव्य और मनोरम रूप से निर्माण कराया। जो आज देवयानी सरोवर के नाम से जाना जाता है। तभी से यहां प्रथम पिंड दान की परंपरा चली आ रही। पितृ तर्पण का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि श्राद्ध करने के लिए मनुस्मृति और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार दिवंगत पितरों के परिवार में ज्येष्ठ या कनिष्ठ पुत्र और अगर पुत्र न हो तो नाती, भतीजा, भांजा और शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान देने के पात्र हैं।
पिंडदान कराने वाले पंडित उमाशंकर पाठक ने बताया कि पितृ पक्ष में तर्पण के लिए प्रथम पिंडदान देवयानी सरोवर में किया जाता है जिससे पितृ पक्ष में तर्पण करने का वालों का बड़ी संख्या में भोर पहर से तांता लगा रहता है। साथ ही लोग पितरों के पानी देने के लिए सरोवर में आते हैं। कानपुर देहात की वेबसाइट समेत जिले की धरोहर की सूची में सरोवर की पौराणिकता एवं ऐतिहासिकता के प्रमाण देखे जा सकते हैं।