अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। मेडिकल स्टोर के लाइसेंस में आईडी नंबर से होने वाले घपले को रोकने के लिए ड्रग विभाग ने नया साफ्टवेयर तैयार किया है। फार्मासिस्ट व मेडिकल स्टोर संचालक की अलग-अलग आईडी होगी। तभी आनलाइन लाइसेंस जारी होगा और नवीनीकरण हो सकेगा। जिले में इसी माह नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
जनपद में 700 फुटकर मेडिकल स्टोर और थोक दवा प्रतिष्ठान हैं। मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के लिए दुकानदार और फार्मासिस्ट को अलग-अलग आईडी नंबर दिए जाएंगे। इंडियन फार्मेसी काउंसिल और ड्रग कंट्रोलर इसी आईडी नंबर पर दुकानदार व फार्मासिस्ट के विवरण का सत्यापन करेंगे।
इसके बाद आवेदक को ऑनलाइन लाइसेंस मिलेगा। अब ड्रग विभाग नया साफ्टवेयर तैयार कर रहा है। इसमें लाइसेंस के रिन्यूअल और आवेदन के लिए दुकानदार व फार्मासिस्ट से जुड़े सभी प्रमाणपत्र स्कैन कर अपलोड करने होंगे। फीस भी जमा करनी होगी। यह प्रक्रिया एक जनवरी से लागू हो गई है।
ड्रग इंसपेक्टर श्रीकांत गुप्ता ने बताया कि दुकानदार व फार्मासिस्ट के अलग-अलग आईडी नंबर होंगे तभी लाइसेंस दिया जाएगा। बिना लाइसेंस व फार्मासिस्ट के अब मेडिकल स्टोरों में दवा की बिक्री की तो तत्काल पकड़ में आ जाएगा और संबंधित मेडिकल स्टोर संचालक लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल स्टोर लाइसेंस के लिए नया सॉफ्टवेयर
दुकानदार और फार्मासिस्ट की अलग-अलग होगी आईडी
बिना फार्मासिस्ट दवा बेची तो लाइसेंस होगा निरस्त