अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। बुंदेलखंड में कम बारिश होने से सूखे के हालात हो गए हैं। वहीं सरकारी फाइलें पर्याप्त बारिश से लबरेज हैं लेकिन किसानों के खेत इसके विपरीत हालात बयां कर रहे हैं। उधर, यहां के बांधों ने भी साफ तौर पर सूखे का संकेत दे दिया है। चित्रकूटधाम मंडल के एक दर्जन बांधों में कोई भी बांध शत-प्रतिशत नहीं भरा है। महोबा के उर्मिल और चित्रकूट के ओहन बांध महज आठ प्रतिशत भर पाए हैं। बांधों में पानी न होने से मुख्य केन नहर के जरिए खरीफ (धान) की फसल को पूरे समय पानी नहीं मिल सकेगा। इसके अलावा नवंबर में पलेवा के लिए भी पानी के लाले रहेंगे।
बुंदेलखंड के किसी भी जनपद मेें इस वर्ष अब तक मानक के मुताबिक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। औसत से 400 मिलीमीटर कम पानी बरसा है। ऐसे में चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में बांधों और नदियों में पानी का अकाल पड़ने के पूरे हालात हैं। सोमवार (18 सितंबर) को मंडल के बांधों की ताजा स्थिति से साफ पता चल रहा है कि खरीफ के साथ रबी की फसलों को भी पानी के लाले पड़ेंगे। सिंचाई विभाग ने बांधों की यह सूरते हाल उच्चाधिकारियों को भेजी है।
सिंचाई विभाग ने बरियारपुर बांध के फाटक एक माह पहले ही खड़े कर दिए हैं। शेड्यूल के मुताबिक हर वर्ष 15 अक्तूबर को गेट खड़े किए जाते थे। बरियारपुर बांध सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना जनपद में स्थित है। इसी बांध से केन मुख्य नहर निकली है। लगभग 1100 किलोमीटर लंबी नहर से सबसे ज्यादा बांदा जनपद में सिंचाई होती है।
गंगऊ बांध से आया पानी बरियापुर बीयर में फाटक खड़े करके रोक लिया जाता है। इससे पूरे साल कई चरणों में केन मुख्य नहर चलाई जाती है। अबकी बारिश बेहद कम हुई है। मानसून विदाई की बेला में है। ऐसे में गंगऊ और बरियारपुर बांध का रखरखाव करने वाले सिंचाई प्रखंड तृृतीय, बांदा ने बरियारपुर बांध के सभी 163 फाटक (गेट) खड़े कर दिए हैं। ताकि बीयर में आने वाला पानी अब रोका जा सके।
क्रस्टवाल पर लगे भारी भरकम गेटोें को कई दिनों की मशक्कत के बाद खड़ा किया गया है। बरियारपुर का जल स्तर सोमवार को 612.2 क्यूसेक पर था। यहां से केन नहर 8 फीट गेज (2500 क्यूसेक) पर चलाई जा रही है। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बताया कि बांध में मात्र 11 दिन का पानी शेष है। जबकि शेड्यूल के मुताबिक 31 अक्तूबर तक लगातार नहर चलाई जानी है। बारिश न हुई तो 11 दिनों बाद बांध खाली हो जाएगा और फिर नवंबर माह में गेहूं की फसल की पलेवा के लिए भी पानी के लाले पड़ जाएंगे।
-13 बांधों में कोई भी नहीं हुआ लबालब
-औसत से 400 मिलीमीटर कम पानी बरसा है
-एक माह पहले ही खड़े कर दिए गए बांध के फाटक
-केन नहर चलाने के लिए सिर्फ 11 दिन का पानी