कानपुर देहात। नए शिक्षण सत्र के साढ़े तीन माह बीत गए हैं पर अब तक बच्चों के हाथों में किताबें नहीं पहुंची हैं। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने की कवायद चल रही है। शिक्षक भी अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं लेकिन बिना किताबों के पाठ्यक्रम को कैसे पढ़ाया जा सकता है, इससे अभिभावक चिंतित हैं। प्रोन्नत होकर अगली कक्षा में पहुंचने वाले बच्चे बिना किताबों के ऑनलाइन पढ़ाई में औपचारिकता निभा रहे हैं।
परिषदीय, सहायता प्राप्त और राजकीय कॉलेजों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के एक लाख 74 हजार 768 छात्र छात्राओं को निशुल्क किताबों का वितरण किया जाना है। नए शिक्षण सत्र की शुरुआत एक अप्रैल से हो गई थी। अधिकतम 30 अप्रैल तक पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाना चाहिए लेकिन अभी तक किताबों का वितरण नहीं हो सका है।
इससे छात्र छात्राओं को पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है। नए कक्षा में प्रोन्नत होने के बाद किताबें न होने से बच्चे पाठ्यक्रम की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। जो पाठ्य पुस्तकें जिले को उपलब्ध हुई हैं उनका वितरण अब तक बच्चों को नहीं किया गया है। इससे चिंतित अभिभावकों ने बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की है।
बिना किताबों के कैसे मदद करेंगे प्रेरणा साथी
शासन के निर्देश पर प्रत्येक शिक्षक को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे गांव-गांव में प्रेरणा साथी तैयार करें। जिन अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं हैं प्रेरणा साथी ऐसे बच्चों की मदद करेंगे। वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ने के लिए फोन उपलब्ध कराएंगे। वहीं अब समस्या ये आ रही है कि ऑनलाइन शिक्षण कार्य के दौरान छात्रों को जो पाठ पढ़ाया जा रहा है उसकी किताब ही उनके पास नहीं है। ऐसे में ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाती है और न ही प्ररेणा साथी उसकी मदद कर पाते हैं।
ऑनलाइन पढ़ाई में भी हो रही दिक्कत
गौरीपुरवा के चांदीलाल सविता कहते हैं कि सरकार बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई की बात कह रही है। जब बच्चों के पास किताबें ही नहीं हैं तो वह किस आधार पर ऑनलाइन पढ़ाई करें। शिक्षकों की तरफ से दिया गया होमवर्क भी पूरा करने में परेशानी होती है। गजनेर के इंद्रपाल यादव कहते हैं कि यदि बच्चों के पास किताबें हो तो घर के लोग भी उन्हें पढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
जब किताबें ही नहीं हैं तो अभिभावक चाह कर भी पाठ्यक्रम से संबंधित पढ़ाई नहीं करा पाते हैं। गोगूमऊ के दीपक सिंह कहते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान किताब पढ़ाई जाती है। किताब से ही होमवर्क दिया जाता है। बच्चों के पास किताब नहीं होने से वह पढ़ाई में केवल खानापूरी कर रहे हैं। इससे शिक्षा की नींव कमजोर हो रही है। हरचंदापुर के भानू सचान ने बताया कि किताबों की व्यवस्था समय से करा दी जाती तो बच्चे घर में पढ़ाई कर सकते थे।
टेंडर के इंतजार में डंप साढ़े तीन लाख किताबें
प्रदेश स्तर से जिले को साढ़े तीन लाख किताबें उपलब्ध करा दी गई हैं। इन्हें ब्लॉक तक पहुंचाने के लिए वाहनों के टेंडर होने हैं। ब्लॉक में किताबें पहुंचने के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वह प्रत्येक स्कूल पर छात्र संख्या के आधार पर पुस्तकों को भेजें। इस प्रक्रिया में करीब एक माह का समय लगने की उम्मीद है। इससे बच्चों को किताबों के लिए अभी और इंतजार करना होगा। (संवाद)
जिले में किताबें अभी कुछ ही दिन पहले आई हैं। उन्हें ब्लॉक स्तर पर पहुंचाने के लिए टेंडर कराकर किराए पर वाहन लिए जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही ब्लॉक स्तर तक किताबें बच्चों तक पहुंच जाएंगी। - सुनील दत्त, बीएसए