पर्यावरण सुधारने और प्रदूषण कम करने के नाम पर पिछले पांच सालों में 1.14 करोड़ पौधे लगाए गए। ये पौधे पनपे या सूख गए, इसकी सुध किसी ने नहीं ली। 2019 के बाद से सर्वे ही नहीं हुआ। इस बार बारिश से पहले फिर 42.87 लाख पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। बता दें कानपुर का भौगोलिक क्षेत्रफल 3155 वर्ग किमी है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाली क्षेत्र केवल 2.11 प्रतिशत है।
वित्तीय वर्ष पौधे
चौबेपुर, बिधनू में लगाए गए 1900 पौधे सूखे
मनरेगा विभाग ने पिछले साल चौबेपुर के रौतापुर गांव में करीब 400 पौधे लगाए थे, लेकिन एक भी पौधा नहीं बचा। इसी तरह बिधनू ब्लॉक के सेन पश्चिम पारा के ऊसर में 1500 पौधे लगाए गए, जो सूख गए। कमोवेश यही स्थिति अन्य क्षेत्रों की भी रही।
वन विभाग पूरी जिम्मेदारी से पौधरोपण कराता है। इसके बाद उनकी देखरेख करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। उनकी लापरवाही में पौधे सूख जाते हैं। इसके लिए जिम्मेदारों और जनता को ही पौधों को बचाने के लिए जागरूक होना पड़ेगा। सर्वे भारतीय सर्वेक्षण विभाग नामित एजेंसी से कराता है। अभी तक क्यों नहीं हुआ, इसके बारे में जानकारी नहीं है। -दिव्या, जिला वन अधिकारी