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उसने बताया, डॉक्टर का गुप्तांग काट पत्नी को क्यों किया पार्सल?

Sat, 27 Jul 2013 11:43 AM IST
कानपुर/ब्यूरो
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में रनियां के गेस्ट हाउस में हुई डॉ. सतीश चंद्रा की हत्या का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि एक अकेली युवती प्रीति ने पूरी योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
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पुलिस के अनुसार प्रीति ने बताया कि वह 13 साल से डॉक्टर चंद्रा का उत्पीड़न सह रही थी। उसे नशीला इंजेक्शन लगाकर डॉ. चंद्रा अपनी हवस मिटाते थे। वह उसके साथ अप्राकृतिक सेक्स भी करते थे। अब उसकी बहन पर भी गलत नजर डाल रहे थे, इसलिए उस ‘दानव’ को मार डाला।

डॉक्टर का गुप्तांग काट कर उसने समाज को संदेश देने का काम किया है। उसे पार्सल इसलिए किया क्योंकि डॉक्टर की पत्नी नासमझ थी। शिकायत के बाद भी उसने अपने पति को नहीं सुधारा और उसे ‘भगवान’ समझती थी।
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बर्रा-7 निवासी डॉ. सतीश चंद्रा की हत्या 21 जुलाई को रनिया के उत्तर प्रदेश पर्यटन आवास गृह राही के कमरा नंबर 101 में हुई थी।

एसएसपी यशस्वी यादव ने बताया कि शुक्रवार दोपहर में एक मुखबिर ने बताया कि हत्या करने वाली युवती गोविंदनगर कच्ची बस्ती में बैठी है। पुलिस टीम पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।

प्रीति गोविंद नगर कच्ची बस्ती में रहने वाले रिटायर्ड नगर निगम कर्मी भगवान दास की बेटी है। हालांकि प्रीति ने दावा किया कि उसने खुद गोविंदनगर थाने जाकर आत्मसमर्पण किया है।

प्रीति ने बताया कि वह भगवान माने जाने वाले डॉक्टर के दानवी रूप से ऊब चुकी थी। जब वह हाईस्कूल में थी, तब डॉ. चंद्रा उसकी बहन का इलाज करने घर आए थे। उन लोगों ने गरीबी का हवाला दिया था।

इंटर में पढ़ाई के दौरान डॉ. चंद्रा ने बर्रा-7 की अपनी क्लीनिक में उसे नौकरी दे दी। साथ ही पढ़ाई और ट्रेनिंग भी देते थे। उन्होंने कई बार आर्थिक मदद भी की। उसे नहीं पता था कि डॉ. चंद्रा की नजर उसके शरीर पर थी।

एक दिन उन्होंने बुखार होने की बात कह पैरासिटामॉल देने के बहाने उसे कोई इंजेक्शन लगाया। वह बेसुध हो गई और डॉक्टर ने उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया। इसके बाद तो सिलसिला ही चल निकला।

2003 में डॉक्टर ने उससे कहा कि वह उससे प्यार करता है। वह तब तक नशे की आदी हो चुकी थी। इसका फायदा उठाकर भी वह शारीरिक शोषण करते रहे। प्रीति ने बताया कि डॉ. चंद्रा ने एक दिन उसकी बहन के साथ गलत काम करने की कोशिश की।

तभी मन बना लिया कि ऐसे दानव को खत्म करना जरूरी है। उसने डॉक्टर की पत्नी को समझाने की कोशिश की तो वह डॉ. चंद्रा को भगवान से कम मानने को तैयार नहीं थी। जबकि उसे सब पता था।

प्रीति ने बताया कि 15/16 जुलाई को उसने खुद फोन कर डॉक्टर साहब को राही गेस्ट हाउस बुलाया। उन्होंने 21 जुलाई का वक्त दिया। 21 जुलाई को वह पहले ही वहां पहुंच गई। ढाई घंटे इंतजार के बाद डॉ. चंद्रा आए।

उसे कमरा नंबर 202 ठीक नहीं लगा, इससे ऐन वक्त पर बदलवा कर 101 करा दिया। वहां उसने ढेरों गोलियां शराब की बोतल में डाल दी। डॉक्टर शराब पीकर बेसुध हो गए तो सबसे पहले उनका होंठ स्टेपल किया लेकिन वह ठीक से नहीं हो पाया।

तब डाक्टर के हाथ-पैर बांधकर मुंह पर टेप चिपका दिया। इसके बाद धारदार चाकू से गला काटा। इसके बाद उन्हीं के खून से दीवार पर इबारत लिखी। फिर गुप्तांग काट दिया। इसके लिए उसने डॉ. चंद्रा के सीजर ब्लेड का उपयोग किया।

कमरे के पीछे के दरवाजे की कुंडी वह पहले ही बाहर से खोल आई थी। हत्या करने के बाद प्लास्टिक में गुप्तांग रखकर आराम से पीछे का दरवाजा खोला और भागकर सड़क पर आ गई। वहां से बस में बैठकर कानपुर आ गई। तबसे अपने घर में रह रही थी।
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