छिबरामऊ। हसेरन के निजी नर्सिंग होम में बुखार का इलाज कराने के लिए पहुंचे युवक की हालत नाजुक होने पर स्टाफ ने उसे बाहर जाने की सलाह दी। परिजन जब युवक को 100 शैया अस्पताल लेकर पहुंचे तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों ने युवक की गलत इंजेक्शन लगाने से मौत होने का आरोप लगाया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम देहकापुर्वा निवासी नीरज नायक (35) की मंगलवार सुबह तबीयत खराब हो गई। जिस पर परिजन उसे हसेरन कस्बे के एक निजी नर्सिंग में ले गए। नीरज के भाई पंकज ने आरोप लगाया कि निजी नर्सिंग में कोई चिकित्सक नहीं था और स्टाफ ने भाई का इलाज शुरू कर दिया। महज दो घंटे में ही इलाज के नाम पर उनसे 15 हजार रुपये ले लिए, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। वह लगातार भाई को बाहर ले जाने के लिए पूछते रहे, लेकिन वहां पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने लेकर जाने नहीं दिया। सुबह नौ बजे के स्टाफ ने भाई को बाहर लेकर जाने के लिए कहा। तब नीरज को 100 शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने गलत इंजेक्शन से उसकी मौत होने का आरोप लगाया, जिसके बाद शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया।
सूचना पाकर इंदरगढ़ थानाध्यक्ष किशन पाल सिंह मौके पर पहुंच गए और परिजनों से मामले की जानकारी ली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने बताया कि मृतक नीरज फेरी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके परिवार में मां कस्तूरी देवी के अलावा पत्नी पिंकी व दो बेटे आर्यन व पुष्कर हैं। वह चार भाई व दो बहनों में सबसे बड़ा था। उसके शव पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।