रदेश पर काबिज हुई योगी सरकार ने थाना, कोतवाली में अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों को न्याय दिलाने के लिए एक्शन प्लान जमीन पर उतारने की कवायद शुरू कर दी है। अब थाने पहुंचने वाले लोगों को अपनी फरियाद के लिए एसपी अथवा दरोगाओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। डीजीपी ने पुलिस अधीक्षक को दस बिंदुओं का पत्र भेजा है। बताया कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाए। थाने में किसी महिला की शिकायत कोई भी पुरुष अधिकारी नहीं सुनेगा।
डीजीपी ने निर्देश दिए कि थाना कार्यालय के अभिलेख दुरुस्त कर लिए जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर पत्रावलियों को आसानी से खोजा जा सके। अभिलेखों का रखरखाव सही तरीके से किया जाए। थाना परिसर में आगंतुक कक्ष, मेस, बैरक, शौचालय, लाकअप की सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। मालखाना, शस्त्रागार का रख-रखाव ठीक करें। प्रत्येक थाने में आगंतुक के बैठने की व्यवस्था की जाए। थाने आने पर आगंतुकों की समस्या सुनने के लिए दिवसाधिकारी नियुक्त किया जाए।
उसका सूचक पद पर नाम अंकित किया जाए, ताकि लोगों को उससे मिलने में आसानी रहे। महिलाओं की समस्या महिला कर्मी ही सुनें। थाने के मुख्य गेट के बाहर बोर्ड पर थाना प्रभारी से लेकर उच्चाधिकारियों के सीयूजी नंबरों को अंकित कराएं। थाने पर बिना किसी विधिक प्रक्रिया के किसी को जबरन रोकने की जरूरत नहीं है।
थाना परिसर की दीवारों पर पान, गुटखा, इत्यादि के निशान न मिलें। यदि ऐसा पाया जाता है तो थाना प्रभारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। कोई भी पुलिस कर्मी अपने अधिकार क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान नशे-पान, तंबाकू, शराब इत्यादि का सेवन नहीं करेगा।
कोट
शासन के ये बिंदु पहले से हाईकोर्ट के निर्देश पर लागू हैं। इन बिंदुओं को प्रभावी ढंग से लागू कराने के निर्देश सभी थाना प्रभारियों को दे दिए गए हैं। पीड़ितों की हर हाल में समस्या का समाधान होगा। - दिनेश कुमार पी (पुलिस अधीक्षक, कन्नौज)