तिर्वा। जहर खाने से महिला की कानपुर में मौत हो गई। शव के अंतिम संस्कार को लेकर मायके और ससुराल पक्ष के बीच विवाद हो गया। मायके वालों ने नाती के नाम जमीन, सात लाख रुपये और जेवर देने की मांग करते हुए शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। 24 घंटे तक शव घर में रखा रहा। पुलिस के पहुंचने और काफी समझाने के बाद सोमवार शाम को अंतिम संस्कार कराया जा सका।
ग्राम बरुआहार निवासी राजबहादुर की पत्नी मीना (31) ने शनिवार सुबह घरेलू विवाद के चलते जहर खा लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज ले गए। सुधार न होने पर कानपुर के हैलट अस्पताल और बाद में निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां रविवार को मौत हो गई। शाम को शव गांव आया, जिसके बाद बिल्हौर थाना क्षेत्र के वासुक नवादा गांव से आए मायके वालों ने जमीन और जेवर की मांग को लेकर अंतिम संस्कार रोक दिया।
इसके बाद रातभर पंचायत चलती रही। सोमवार को मीना के ससुर गुरुदयाल ने अपनी आधी खेती मीना के पुत्र मयंक के नाम करने पर सहमति जताई। तब अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई लेकिन मायके वालों ने सात लाख रुपये और जेवर देने की नई मांग रख दी और शव उठने नहीं दिया। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
कोतवाल संजय कुमार शुक्ल और कस्बा चौकी प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत की। ग्रामीणों के अनुसार मीना के 14 वर्षीय पुत्री रौनक और 12 वर्षीय पुत्र मयंक हैं। काफी समझाने-बुझाने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। कोतवाल ने बताया कि दोनों पक्षों में आपसी सहमति के बाद शव का अंतिम संस्कार हो गया है।