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मेरे खिलाफ जब फर्जी मुकदमा लिखा गया, तब क्यों नहीं की पहल : सुब्रत

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फोटो :35: सुब्रत पाठक, पूर्व सांसद
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कन्नौज। पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने जिला प्रशासन और स्थानीय राजनीति के मौजूदा रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जिला प्रशासन ने माफी मांग ली है तो मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए। जब मेरे खिलाफ 2023 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने बिना जांच के फर्जी प्राथमिकी दर्ज लिख दिया उस समय समाज कल्याण मंत्री ने कोई पहल क्यों नहीं की। उनको उस समय भी एसपी से बात करनी चाहिए थी। क्योंकि दर्ज प्राथमिकी सुब्रत के खिलाफ नहीं बल्कि कन्नौज के मौजूदा सांसद के खिलाफ लिखी गई थी।
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पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव प्रचार में लगे पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने संवाद समाचार एजेंसी से हुई फोन पर बातचीत में बताया कि तीन जून 2023 को निगम मंडी चौकी प्रभारी हाकिम सिंह ने उनके खिलाफ तत्कालीन एसपी कुंवर अनुपम सिंह के निर्देश पर संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उस समय भी सदर विधायक असीम अरुण प्रदेश सरकार में मंत्री थे। उन्होंने इस घटना को लेकर उस समय कोई बयान नहीं दिया और न ही एसपी से बात की थी। हालांकि पुलिस को साक्ष्य नहीं मिले तो अगस्त 2024 में पुलिस ने एफआर लगा दी थी।
सुब्रत पाठक ने बताया कि इस पूरे मामले में स्थानीय मंत्री को सक्रिय हस्तक्षेप करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हैरानी की बात यह रही कि जहां एक ओर सुब्रत पाठक ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वहीं दूसरी ओर उन्होंने जिला प्रशासन को इस विवाद में क्लीनचिट दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रशासन को दोषी नहीं मानते क्योंकि अफसरों ने मंत्री के प्रतिनिधि को कार्यक्रम का समय बदलने की सूचना दे दी थी। इसमें अनुशासनहीनता का कोई प्रश्न ही नहीं है।
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