गेहूं खरीद के लिए भले ही जिला प्रशासन ने जनपद में 46 क्रय केंद्रों की स्थापना विगत एक सप्ताह पहले की जा चुकी हो, लेकिन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में अधिकारियों ने कोई रुचि नहीं ली है। इसके चलते पहले दिन भी क्रय केंद्रों पर न तो बैनर लगाया गया और न ही उन्हें खोलने की जरूरत समझी। जिला मुख्यालय स्थित नवीन मंडी स्थल में स्थापित तीन संस्थाओं के गेहूं क्रय केंद्रों पर यह हाल देखने को मिला।
वर्ष 2015-16 में सरकारी समर्थन मूल्य का किसानों को लाभ दिलाने के लिए जगह-जगह क्रय केंद्रों के खोले जाने की घोषणा की गई थी। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना न पड़े इसके लिए करीब 7 किमी के घेरे में क्रय केंद्रों को स्थापित करने की बात कही गई थी। लेकिन गेहूं खरीद में नोडल एजेंसियां कितनी गंभीर हैं इसका उदाहरण जिला मुख्यालय स्थित नवीन मंडी स्थल में देखने को मिला।
बुधवार दोपहर एक बजे खाद्य विभाग द्वारा स्थापित क्रय केंद्र में ताला लटका मिला। केंद्र के बाहर कूड़ा-कचरा पड़ा था। क्रय केंद्र की जानकारी देने के लिए कोई संकेतक भी नहीं लगा था। इस बारे में जब केंद्र प्रभारी गुरमीत सिंह बग्गा से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि अभी वे बाहर से लौटी हैं।
संस्था द्वारा बैनर नहीं उपलब्ध कराया गया है। जल्द ही क्रय केंद्र पर व्यवस्थाएं बहाल की जाएंगी। इसी परिसर में राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के गेहूं खरीद केंद्र का भी यही हाल था। केंद्र प्रभारी विजय कुमार शुक्ला की मानें तो अभी तक उन्हें गेहूं खरीद केंद्र का प्रभारी बनाए जाने का आदेश नहीं मिला है।
किसानों को उनकी उपज का सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने के लिए प्रचार-प्रसार तो दूर, केंद्रों पर भी इसका बोर्ड नहीं लगाया गया है। महिला उपभोक्ता सहकारी समिति की प्रभारी सुमन ने बताया कि केंद्र पर व्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए छन्ना, कांटा-बांट व शीतल पेयजल के लिए घड़े की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी को केंद्र पर सफाई व अन्य व्यवस्था के लिए भेजा गया था। बैनर अभी नहीं मिला है। दो अप्रैल से नियमित केंद्र खोला जाएगा।