कन्नौज। इत्रनगरी से एक हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है। लूट के एक मामले में पूरे 31 साल बाद अदालत का फैसला मंगलवार को आया है। अदालत ने जिस आरोपी को दोषी ठहराया है, वह आज पूरी तरह नेत्रहीन है और भीख मांगने को मजबूर है। यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। तीन दशक बाद न्याय तो मिला लेकिन तब तक मुजरिम खुद लाचारी की बेड़ियों में जकड़ चुका था। जो कभी लूट का आरोपी था, वह अब कस्बों और गांवों में भीख मांगकर जीवन यापन करता है।
यह मामला वर्ष 1995 में शुरू हुआ था। कोतवाली गुरसहायगंज के अरमान सिंह ने छिबरामऊ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बहबलपुर निवासी पलउआ उर्फ मानसिंह गिहार ने उनके साथ मारपीट और लूटपाट की थी। पुलिस ने जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद यह मामला तीन दशकों तक चला। वर्ष 2006 में एक झगड़े में मानसिंह की दोनों आंखों की रोशनी चली गई थी। उसकी पत्नी जगरानी भी एक आंख से दिव्यांग है। उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं, जो अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं। मानसिंह अपनी दिव्यांग पत्नी के साथ जैसे-तैसे गुजारा कर रहा है।
अपर जिला जज (द्वितीय) विशेष न्यायाधीश (डकैती विरोधी) हरिप्रसाद की अदालत में इस मामले की अंतिम सुनवाई हुई। आरोपी पलउआ ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और माफी की गुहार लगाई। अदालत ने सबूतों और गवाहों के आधार पर पलउआ उर्फ मानसिंह गिहार को दोषी पाया। उसकी वर्तमान शारीरिक स्थिति और लाचारी को देखते हुए अदालत ने उसे छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 800 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।