छिबरामऊ। गणेश महोत्सव को लेकर फर्रुखाबाद रोड स्थित इंदिरा आवास काॅलोनी में शुक्रवार को जय बालाजी सेवा समिति की बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि 27 अगस्त से गणेश महोत्सव को शुरुआत होगी जो धूमधाम से मनाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष सर्वेश कुमार तिवारी ने सभी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी।
अध्यक्ष सर्वेश कुमार तिवारी ने कहा कार्यक्रम को भव्य बनाने में हम सभी अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें। गणेश महोत्सव की शहर में एक अलग पहचान है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष महोत्सव में बैंड बाजे व कलश यात्रा के साथ 27 अगस्त को सुबह आठ बजे विघ्नहर्ता भगवान गणेशजी विराजमान होंगे। इसके बाद प्रतिदिन सुबह आठ बजे आरती व रात आठ बजे महाआरती होगी। रात नौ से 11 बजे तक जीवंत झांकी व सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। दो सितंबर को सुंदरकांड का पाठ रात्रि नौ बजे से प्रारंभ होगा। 56 भोग एवं दिव्य देव आरती चार सितंबर को रात आठ बजे से होगी।
श्री गणेश भोग एवं विशाल भंडारे का आयोजन पांच सितंबर को दोपहर दो बजे से प्रारंभ होगा। गणेश विसर्जन यात्रा छह सितंबर को सुबह नौ बजे श्री गणेश चौक इंदिरा आवास कॉलोनी से शुरू होगी। यह यात्रा फर्रुखाबाद चौराहा होते हुए पश्चिमी बाईपास, मुख्य बाजार, सौरिख रोड स्थित मां कालिका देवी मंदिर होते हुए ककरारी तालाब पर संपन्न होगी। बैठक में मनु गुप्ता, प्रशांत त्रिपाठी, पंकज मिश्रा, हृदेश अग्रवाल, रजनी सक्सेना, दशरथ श्रीवास्तव, गीता कश्यप, अनामिका अग्रवाल, पवन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मूर्तियां करे तरासने में जुटे कारीगार, उत्सव की तैयारी शुरू
फोटो :08: बड़ी गणेश मूर्ति को अंतिम रूप देते कलाकार। संवाद
फोटो :09: छोटी मूर्तियां की रंगाई करते मूर्तिकार। संवाद
तालग्राम। गणेश चतुर्थी का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, लोगों में उत्सुकता बढ़ती जा रही है। भगवान गणेश की मूर्तियों को तरासने और अंतिम रूप देने में कारीगर जुट गए हैं। पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान में रख कर मिट्टी से मूर्तियां बनाई जा रही हैं। 27 अगस्त पंडालों और घरों में गणेशजी को विराजमान किया जाएगा। छह सितंबर को गणेश विसर्जन का कार्यक्रम आयोजित होगा।
क्षेत्र में श्रीगणेश की मूर्ति को तैयार करने को लेकर कारीगरों के हाथ तेजी से चल रहे हैं। समय पर मूर्तियां तैयार हो सके इसके लिए परिवार के सदस्य भी जुटे हैं। हालांकि, निर्माण में कारीगरों के सामने मुश्किलें भी खड़ी हैं। दरअसल, निर्माण सामग्रियों उपलब्ध नहीं हो रही है। तालग्राम के रसूलाबाद राधारानी मूर्ति कला केंद्र के मूर्तिकार रामविलास प्रजापति, अपने पुत्र रोहित, मोहित और परिवार के साथ मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उनके अनुसार पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार गणेशजी की मूर्तियों की मांग अधिक है। बताया कि पर्यावरण को ध्यान में रखकर मूर्तियां को मिट्टी से बनाया जाता है। उनके ऊपर जो रंगों का प्रयोग किया जाता है, वह भी कच्चे ही होते हैं, इस कारण प्रदूषण नहीं फैलता है।
सलेमपुर निवासी रोहित प्रजापति बताते हैं कि बाबा के जमाने से मिट्टी के बर्तन और मूर्ति बनाने का काम चल रहा है। पंडाल में सजावट के लिए भक्तों में बड़ी मूर्तियों की मांग ज्यादा है। यूं तो मूर्तियां दो से आठ फीट तक ऊंची बनाई जाती हैं। वहीं, भक्तों की डिमांड पर 10 से 12 फीट ऊंची मूर्ति भी बनाई जा रही है। छोटी मूर्तियां तो दीपावली तक बिकती रहती हैं। अभी तक 100 बड़ी मूर्ति बुकिंग हो चुकी हैं। स्थानीय बाजारों के अलावा कानपुर, दिल्ली तक मूर्ति भेजते हैं।