सात जुलाई 2012 को जनपद के छिबरामऊ थानाक्षेत्र के एक गांव की एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने व जबरन शादी करने के मामले में कोर्ट ने ठीक पांच वर्ष बाद अपना फैसला सुनाया। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने फैसला देते हुए एक आरोपी को सात व दूसरे को पांच वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार दुबे ने बताया कि जनपद के थाना विशुनगढ़ क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने क्षेत्र के गांव सिंहपुर थाना विशुनगढ़ निवासी आशीष उर्फ संदीप पुत्र रामकिशोर व हरेंद्र पुत्र बृजवासी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हवाला दिया कि वह दोनो उसकी 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले गए। घटना के ठीक 27 दिन बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया और लड़की भी पुलिस के हाथ लग गई। लड़की ने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में बताया कि वह सात जुलाई को छिबरामऊ के प्रेमपुर दवा लेने जा रही थी।
तभी उक्त दोनो आरोपी उसे बहला-फुसलाकर ले गए। किशोरी ने बताया कि हरेंद्र उसे अपने साथ दिल्ली और फिर वहां से रतलाम ले गया। वहीं, उसने उसके साथ जबरन शादी की। मजिस्ट्रेट के आदेश पर पीड़िता का डाक्टरी परीक्षण कराया गया। मामले की विवेचना तत्कालीन विशुनगढ़ एसआई प्रताप सिंह को सौंपी गई। विवेचक ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार दुबे ने बताया कि न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने दोनो पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संदीप सिंह व हरेंद्र सिंह को दोषी पाया। कोर्ट ने संदीप सिंह को सात वर्ष की सश्रम कारावास सुनाया व 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। वहीं, हरेंद्र को पांच वर्ष का सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना वसूलने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में वसूली जाने वाली रकम से 20 हजार पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया है।