39 गांव के कागज क्या जले लोगों को कई परेशानियों ने घेर लिया। हालत यह है कि बगैर भू अभिलेख हर काम ठप पड़ा है। छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र के तहत इंदुइयागंज स्थित काली नदी पर सेतु निगम ने पुल बनाकर खड़ा कर दिया है, मगर उतार और चढ़ाई के लिए दोनों तरफ जमीन ही नहीं मिल पा रही है। सरकार की मजबूरी देखिए बिना कागज के वह राजस्व अधिनियम लगाकर भूमि अधिग्रहण नहीं कर पा रही है
और काबिज लोग मुंहमांगे दाम मांग रहे हैं। वहीं शनिवार को लोक निर्माण विभाग ने अखबारों में गजट जारी करके 24 काबिज लोगों की सूची निकाली है। सहमति से भूमि लेने का निर्देश जारी किया है। सैकड़ों गांव के लोगों को प्रतिदिन काली नदी नाव से पार करके एक तरफ से दूसरी तरफ जाना पड़ता है। सरकार ने वर्ष 2012 में यहां पर पुल स्वीकृत किया था।
पांच करोड़ 16 लाख की लागत से बनने वाले इस पुल को सेतु निगम ने नदी के ऊपर बनाकर खड़ा कर दिया। अब पेंच फंसा दोनों तरफ ढलान और उतार की सड़क बनाने का। 2014 से लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग जमीन लेने के लिए माथापच्ची कर रहा हैं। जमीन ले भी कैसे जब कागज ही नहीं हैं। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने जमीन को चिंहित तो कर लिया मगर काम शुरू नहीं हो सका।
जमीन पर काबिज लोगों ने जमीन देने से मना कर दिया। काफी मशक्कत के बाद तैयार भी हुए तो मुआवजे पर बात अड़ गई। विभाग ने राजस्व अधिनियम के तहत जमीन का अधिग्रहण करना चाहा, मगर कागजात न होने के कारण यहां राजस्व अधिनियम भी नहीं लग पा रहा। ऐसे में अब विभाग काबिज लोगों की चिरौरी कर रहा है। काबिज लोग मुंहमांगे दाम मांग रहे है। पहले 92 लाख रुपये में 0.885 हेक्टेयर जमीन खरीदनी पड़ी थी, मगर अब काबिज लोगों के कारण यह लागत बढ़कर एक करोड़ 55 लाख रुपये कर दी गई है।
कागज न होने के पेंच के कारण पुल दो साल से तैयार खड़ा है मगर सड़क न बन पाने के कारण शुरू नही हो पा रहा। लोग अभी भी नदी को नाव से ही पार कर रहे हैं। पिछले साल नाव पलटने से हादसा भी हुआ था। दो अप्रैल शनिवार को लोक निर्माण विभाग ने अखबारों में गजट जारी करके 24 काबिज लोगों की सूची जारी की है। गजट में साफ उल्लेख किया है कि जमीन के अभिलेख न होने के कारण यह भूमि राजस्व अधिनियम से नहीं बल्कि काबिज लोगों की सहमति से ली जाएगी।