भगवान विष्णु के जागने और सालिगराम-तुलसी विवाह
संपन्न होते ही मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई थी। सहालग शुरू हो
जाने से घरों में मंडप गड़ना शुरू हो गए। वहीं रोजाना बैंडबाजों के साथ
बारातें निकलने से नगर में रौनक छाई हुई है। इस बार सबसे बड़ी सहालग सात
दिसंबर को मानी जा रही है।
इस दिन के तीन मुहूर्त दांपत्य जीवन के लिए खासे
शुभ माने जा रहे हैं। ऐसे में नगर के छोटे-बड़े गेस्ट हाउसों को काफी
समय पहले बुक करा लिए गए थे, जिन्हें गेस्ट हाउस न मिल सके वह लोग आस पड़ोस
खाली मैदानों में ही ब्याह रचाने के लिए टेंट लगाने की व्यवस्था में जुटे
हैं।
नगर में भले ही रोजाना बैंडबाजों के साथ बारातों की धूम मची हुई हो,
पर अबकी सबसे बड़ी सहालग की लग्न सात दिसंबर को मानी जा रही है। इस लग्न
में ब्याह रचाने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा है। इस बारे में पंडित
श्रीकृष्ण चतुर्वेदी ने बताया कि सात दिसंबर को उत्पत्ति एकादशी भी है, जो
काफी सुखदायी होती है।
इसके साथ ही इस दिन पड़ने वाले तीन मुहूर्त भी काफी
खास हैं। इन मुहूर्तों में ब्याह रचाने वाले दंपति का जीवन सुखमय व्यतीत
होने के साथ ही उनके जीवन में हमेशा धनवृद्धि बनी रहेगी। इससे उनका पूरा
जीवन सुखमय गुजरेगा। उन्होंने बताया कि उत्पत्ति एकादशी को पहला मिथुन
लग्न है जो 6:24 से 8:32 बजे तक है।
दूसरा कर्क लग्न 8:32 से शुरू होगा जो
10:51 तक का है। इसके बाद इस दिन का आखिरी सिंह लग्न है, जिसके मुहूर्त का
समय 10:51 से एक बजकर आठ मिनट तक है। शायद इसी लग्न में ब्याह रचाने के लिए
परिजनों ने काफी समय पहले से ही गेस्ट हाउस बुक करा लिए थे।
जिसके कारण इस
दिन नगर का एक भी गेस्ट हाउस खाली नहीं है। सभी गेस्ट हाउसों की काफी समय
पहले से ही बुकिंग हो चुकी है। ऐसे में कई लोग इस लग्न का अधिक महत्व मानते
हुए खाली पड़े मैदानों में ही इन मुहूर्तों में ब्याह रचाने के लिए टेंट
लगवाने की व्यवस्था कर रहे हैं।