इत्र नगरी विघ्नहर्ता के स्वागत को तैयार हो चुकी है। भक्तों में गणपति बप्पा की स्थापना को लेकर उत्साह है। शहर में नौ जगह गणपति बप्पा विराजेंगे। स्थापना के लिए मूर्तियां आ चुकी हैं। देर रात तक पांडालों की सजावट का काम चलता रहा। इस बार कई पांडालों को वाटर प्रूफ बनाया गया है। पांडालों में गणपति केे दर्शन के लिए आने वालों को प्रसाद में मोदक मिलेंगे। शहर के कचहरी टोला मोहल्ला में नौ सिंतबर की रात को पीसी कानपुरी का जादू कार्यक्रम होगा। इसी मोहल्ले में 12 सितंबर की रात नौ बजे बिहार के अमित बिहारी का मिमक्री शो होगा।
यहां विराजेंगे गणपति बप्पा
शहर में नौ जगह गणपति की स्थापना होगी। स्थापना के साथ ही गणपति महोत्सव शुरू हो जाएगा। शहर के मोहल्ला ठकुराना, मकरंद नगर में हनुमान मंदिर के पीछे , कचहरी टोला मोहल्ला, फर्श मोहल्ला में सनातन धर्म सेवा सुरक्षा मंच के तत्वावधान में श्रीबाबा जागेश्वर नाथ महादेव महाराज मंदिर में, कटरा मोहल्ला में, पाटा नाला मोहल्ला के भोलानाथ धर्मशाला में, मीर वैश्य टोला, कुतलूपुर के राम-लक्ष्मण मंदिर प्रांगण और माता क्षेमकली में गणेश भगवान की स्थापना होगी।
यहां पहली बार विराजेंगे गौरी-पुत्र
इत्र नगरी मेें गौरी पुत्र नौ अलग-अलग स्थानों पर विराज रहे हैं। शहर के मोहल्ला कुतलूपुर के राम-लक्ष्मण मंदिर प्रांगण व शहर के सिद्धपीठ मंदिर बाबा गौरीशंकर के पास माता क्षेमकली में प्रथम पूज्य देव पहली बार भक्तों को आशीर्वाद देंगे।
कब होगी प्रथम पूज्य की स्थापना
वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला के मुताबिक गणपति का जन्म मध्यकाल में हुआ था। उनकी स्थापना इसी काल में होनी चाहिए। पंडित पवन शुक्ला के मुताबिक इस बार चतुर्थी को काफी अच्छे संयोग बन रहे हैं। चतुर्थी रविवार शाम 6 बजकर 54 मिनट से लग जाएगी। यह 5 सितंबर को रात 9 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। इसी समय भगवान गणेश की स्थापना का सबसे शुभ योग है।
कब करें बप्पा की पूजा
वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि सोमवार को सुबह से लेकर रात 9:10 के बीच में बप्पा की पूजा और स्थापना कर सकते हैं। पूजा का सबसे अच्छा वक्त सोमवार को दिन के 11 बजे से लेकर दोपहर के 1 बजकर 38 मिनट तक है।
10 दिन चलेगा गणेश उत्सव
इत्र नगरी में10 दिनों तक बप्पा का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाता है। वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला बताते हैं कि वेदों के अनुसार विघ्नहर्ता की पूजा करने से इंसान को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। मुसीबतों से भी छुटकारा मिलता है।
वेदों में प्रचलित है कथा
आचार्य पंडित पवन शुक्ला बताते हैं कि वेदों के मुताबिक माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन तिल चतुर्थी का व्रत किया जाता है। यह व्रत करने से घर-परिवार में आ रही विपदा दूर होती है। कई दिनों से रुके मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। श्रीगणेश असीम सुखों की प्राप्ति कराते हैं। इस दिन गणेश कथा सुनने अथवा पढ़ने का विशेष महत्व है।
चाक-चौबंद रहेगी सुरक्षा
एएसपी सुभाषचंद्र शाक्य ने बताया कि गणेश महोत्सव को लेकर सुरक्षा के लिहाज से पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है। सभी मोहल्लों में आयोजन स्थलों के आसपास पुलिस गश्त पर रहेगी। उन्होंने कार्यक्रम आयोजकों से अपील की है कि यदि सुरक्षा संबंधी किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो उन्हें पर सूचना दें। कोई भी अराजकतत्व कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करता है तो फौरन सूचित करें।