तालग्राम। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए किसान अगेती प्रजातियों की बोआई करें। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बीते पांच वर्षों में बोआई पर किए गए अनुसंधान में पाया गया कि, अगर किसान नवंबर के प्रथम पखवाड़े में यानी एक से 15 नवंबर के बीच करते हैं तो पैदावार में चार से पांच क्विंटल प्रति हेक्टेयर की गेहूं की बढ़ोतरी होती है।
अगेती गेहूं बोआई का यह उचित समय है, जिन किसानों के खेत तैयार हैं वह तुरंत करें। खेत जो धान के बाद खाली हैं, उसी नमी पर जीरो टिलेज, सुपर सीडर या हैप्पी सीडर मशीन का प्रयोग कर बिना खेत को तैयार किए गेहूं की बोबाई कर सकते हैं। इसमें कोई अतिरिक्त लागत भी नहीं लगती है। इससे खेत की तैयारी में लगने वाले समय की बचत होती है। वहीं वे किसान जिनके खेत में पुआल के ढेर हैं तो वह पहले मल्चर मशीन का प्रयोग करें, फिर सुपर सीडर, हैप्पी सीडर या जीरो टिलेज मशीन से बोआई करें।
पराली खाद बनकर खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाएगी। कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल ने बताया कि अच्छी पैदावार के लिए गेहूं की उन्नत प्रजातियाें का चयन करें। एचडी 3226, डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 252, डीबीडब्ल्यू 222 और एचडी 2967 आदि प्रजातियों का उत्पादन अच्छा माना जाता है। राजकीय बीज भंडारों पर यह प्रजातियां उपलब्ध हैं। इन प्रजातियों की अच्छी पैदावार के लिए किसान सुपर सीडर से बोआई करें। पहले खेत में 45 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ के हिसाब से डाल दें और फिर सुपर सीडर में 50 किलोग्राम डीएपी व 40 किलोग्राम पोटाश डालकर बोआई करने से अच्छी पैदावार मिलेगी।