लखनऊ में आतंकी मुठभेड़ के बाद पूरे में प्रदेश हाई अलर्ट है, लेकिन पुलिस महकमा सुस्त नजर आ रहा है। शहर में लगे सभी सीसी टीवी कैमरे एक साल से काम नहीं कर रहे हैं। खंभों पर लगे कैमरे शोपीस साबित हो रहे हैं।
मंगलवार को सूबे की राजधानी लखनऊ में मुठभेड़ में एक आतंकवादी को मार गिराया गया। इसके अलावा कानपुर से भी पुलिस ने कई आतंकवादियों को पकड़ा है। किसी भी शहर व जनपद में आतंकी छिपे होने व आतंकी घटनाओं की आशंका के चलते पूरा प्रदेश हाई अलर्ट पर है। शहर के मुख्य चौराहों, रेलवे स्टेशन और बस स्टाप से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की सुस्ती देखने को मिल रही है।
अलर्ट घोषित होने के बाद भी न तो पुलिस अफसर अपने-अपने आवासों से निकले और न किसी तरह की छानबीन व संदिग्धों की तलाश में चेकिंग अभियान चलाया। शहर में अपराधियों व आपराधिक गतिविधियों की निगरानी के लिए लाखन चौराहा, मिठाई वाली गली, पीतल मंडी, बड़ा चौराहा समेत चूड़ी वाली गली व लोहिया चौराहा समेत बस स्टाप पर पुलिस महकमे की ओर से 21 सीसी टीवी कैमरों को लगाया गया है। पिछले साल पांच जुलाई और 22 अक्तूबर को शहर में सांप्रदायिक दंगों के दौरान दंगाइयों ने इन कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। तब से कैमरे काम नहीं कर रहे हैं।
वहीं, अगर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था की बात की जाए तो स्टेशन पर अभी तक कैमरों को नहीं लगाया गया है।
आंधी पानी में टूट जाती हैं केबिल
शहर के प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और आपराधिक गतिविधियों की निगरानी के लिए पुलिस विभाग ने निजी कंपनी से अनुबंध कर कैमरों को लगवाया है। वायरलैस कैमरे न होने के कारण इनको केबिल के जरिए पुलिस लाइन स्थित कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया गया है। बंदरों और अराजकतत्वों व आंधी-पानी से अक्सर केबिल टूट जाती है। जिससे कैमरों का संपर्क कंट्रोल रूम से टूट जाता है। रेडियो शाखा प्रभारी समर सिंह ने बताया कि निजी कंपनी को कैमरे ठीक करने को कहा गया है। जल्द कैमरे काम करने लगेंगे।
थानों में नहीं वेरीफिकेशन प्रोफार्मा
जिला मुख्यालय समेत कस्बों में किराए में रहने वाले लोगों का बैकग्राउंड जानने के लिए पुलिस वेरीफिकेशन नहीं करती है। मकान मालिक अक्सर किराए से ही मतलब रखते हैं। ऐसे में कोई भी संदिग्ध आसानी से किराए के मकान में रह सकता है। जानकारी करने पर कई थानों के प्रभारियों ने बताया कि वेरीफिकेशन फार्म का प्रोफार्मा न होने से किरायेदारों का वेरीफिकेशन नहीं कराया जा रहा है।
एक सिपाही के जिम्मे बस स्टाप की सुरक्षा
रात में बस स्टाप पर आपराधिक वारदातों से निपटने के लिए सिर्फ एक सिपाही की ड्यूटी लगाई जाती है। अकेले ड्यूटी करने की वजह से सिपाही को राइफल की जगह सिर्फ डंडा थमा दिया जाता है। कई बार स्थानीय लोगों ने बस स्टाप पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी की है। इसके बाद भी अफसर सुरक्षा व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
आतंकवादी का ठिकाना होने की अफवाह
मध्य प्रदेश में भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में धमाका करने वाले तीन आतंकवादियों में एक का कनेक्शन कन्नौज में होने की अफवाह से जिले मेें सनसनी फैल गई। दिन भर स्थानीय लोग आतंकवादी के बारे में जानकारी करने के लिए एक-दूसरे से पूछताछ करते रहे। मध्य प्रदेश में भोपाल-उज्जैन पैसेंजर में धमाका करने वाले दो कानपुर के आतंकवादियों के साथ एक अन्य को गिरफ्तार किया। तीसरे आतंकवादी की पहचान सैैयद मीर हुसैन उर्फ हम्जा पुत्र सैयद अहसान हसन के नाम से की गई। मंगलवार को सोशल मीडिया पर सैयद मीर हुसैन का कन्नौज में ठिकाना होने की अफवाह जिले में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। जिले से आतंकवादी के तार जुड़े होने की घटना को लेकर पुलिस अधिकारी भी कुछ बताने से बचते रहे। जबकि एसटीएफ की जांच में आतंकवादी सैयद मीर हुसैन का हाल निवास पता इंद्रानगर अलीगढ़ है। पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी ने बताया कि जानकारी संज्ञान में नहीं है। अफवाह फैला कर शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास करने वाले लोगों को चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पकड़े गए आतंकवादियों से आरपीएफ करेगी पूछताछ
पकड़े गए आतंकवादियों के तार मंधना में रेलवे ट्रैक काटने की वारदात से जुड़े होने की रेलवे पुलिस ने आशंका जाहिर की है। अधिकारियों ने एसटीएफ से संपर्क साधा है। एक जनवरी की रात आतंकवादियों ने कानपुर के पास मंधना रेलवे स्टेशन के निकट रेलवे लाइन काट दिया था। मंगलवार को मध्यप्रदेश समेत कानपुर व लखनऊ में पकड़े गए छह आतंकवादियों के पास से कानपुर-कासगंज रेलवे रूट का भी नक्शा बरामद हुआ है। इससे रेलवे पुलिस के अफसरों ने आतंकवादियों से पूछताछ करने की बात कही है। बुधवार को घटना की जांच कर रहे आरपीएफ उपनिरीक्षक प्रशांत कुमार ने बताया कि 15 दिन पूर्व बिहार के मोतीहारी में पकड़े गए आतंकवादियों से पूछताछ के दौरान इन आतंकवादियों के नाम प्रकाश में आए थे। इससे कन्नौज आरपीएफ भी इनकी तलाश में थी। एसटीएफ से बातचीत करने के बाद लखनऊ पहुंच कर आतंकवादियों से पूछताछ की जाएगी।