डीएन इंटर कालेज में चल रही मतगणना के दौरान जिला
पंचायत की वार्ड 23 के खामा न्याय पंचायत की मतगणना प्रत्याशियों की शिकायत
के बाद दोबारा कराई गई। रिकाउटिंग में धांधली के आरोप सही न पाने पर
निर्वाचन अधिकारी ने रविवार को मतगणना के दौरान हटाए गए सभी छह कर्मियों को
निर्दोष घोषित कर दिया।
ज्ञात हो कि रविवार की दोपहर खामा न्याय पंचायत
की मतगणना के दौरान प्रत्याशी श्याम सिंह यादव, हुकुम सिंह यादव व सुधीर
यादव ने निर्वाचन अधिकारी को पत्र देकर आरोप जड़ा था कि इस टेबल पर गणना
करने वाले छह कर्मचारी धांधली कर रहे हैं। एक विशेष प्रत्याशी को लाभ
पहुंचा रहे हैं।
इस शिकायत पर सभी छह कर्मचारियों को हटा दिया गया था।
उम्मीदवारों ने इन कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर
भी आरओ को दी थी। जिला निर्वाचन अधिकारी अनुज कुमार झा के निर्देश पर
सोमवार की दोपहर दो बजे के करीब निर्वाचन अधिकारी अरविंद पांडेय ने खामा
न्याय पंचायत की कक्ष संख्या दो के दो चक्र व कक्ष संख्या चार के चार चक्र
की काउंटिंग फिर से कराने के निर्देश दिए।
रिकाउंटिंग के दौरान निर्वाचन
अधिकारी, उमर्दा के बीडीओ रामउदरेज यादव, सेक्टर मजिस्ट्रेट बीआर सिंह के
निर्देशन में वीडियोग्राफी के साथ काउंटिंग शुरू की गई। इसी दौरान डीएम
अनुज कुमार झा, अपर जिलाधिकारी भी इस कक्ष में पहुंचे। काउंटिंग करा रहे
अधिकारियों से वार्ता की।
बाद में निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि रिकाउंटिंग
के दौरान सभी प्रत्याशियों को एक-एक बैलेट पेपर चेक करा दिए गए। काउंटिंग
में कोई गड़बड़ी न मिलने पर हटाए गए सभी छह कर्मचारियों को दोष मुक्त किया
गया। उधर, वार्ड 58 बहसार की खत्म हुई मतगणना के बाद कर्मियों की लापरवाही
के चलते हारे प्रत्याशी को जीता घोषित कर दिया गया।
इससे हड़कंप मच गया। शिकायत
के बाद करीब एक घंटे के बाद गलती को सुधारकर पुन: अलाउंस कर वास्तविक जीते
प्रत्याशी का नाम घोषित किया गया। इस वार्ड से चार प्रत्याशी चुनाव लड़
रहे थे। इसमें महेंद्र को 530 व उनके प्रतिद्वंद्वी ईशाक को 410 मत मिले
थे। कर्मचारियों की लापरवाही के चलते आरओ ने ईशाक को 120 मतों से जीता
घोषित कर दिया। अलाउंस होते ही हड़कंप मच गया।
जीते प्रत्याशी ने आरओ के
समक्ष पहुंचकर शिकायत की। इस पर आंकड़े चेक किए गए। गलती पाए जाने पर आरओ
ने फिर से एलाउंस कर महेंद्र को जीता प्रत्याशी घोषित किया। वार्ड 24 से
पहली बार जिला पंचायत सदस्य पद पर भाग्य अजमा रहे बाल संरक्षण आयोग सदस्य
ज्योति सिंह के पति कृष्ण पाल सिंह जीत नहीं हासिल कर सके।