छिबरामऊ। सिकंदरपुर चौकी क्षेत्र के नौली गांव स्थित नौलेश्वर धाम में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन बुधवार को आचार्य प्रहलाद त्रिपाठी ने धनुष भंग और परशुराम लक्ष्मण संवाद के प्रसंग सुनाएं। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के बीच अहंकार नहीं होना चाहिए। अहंकार के कारण दांपत्य जीवन सुखमय नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सीता स्वयंवर में धनुष तोड़ने की शर्त के पीछे एक संदेश छिपा था। धनुष अहंकार का प्रतीक है। अहंकार जब तक हमारे भीतर होगा। तब तक हम किसी के साथ अपना जीवन व्यतीत नहीं कर सकते। अहंकार को तोड़कर ही वैवाहिक जीवन में प्रवेश करना चाहिए। अहंकार रूपी धनुष तोड़कर राम ने प्रेम रूपी सीता का वरण किया था।
उधर, परशुराम भगवान शिव को अपना आराध्य मानते थे। शिव धनुष टूटने पर ही उन्हें क्रोध आया। धनुष तोड़ने के बाद भी श्रीराम ने जब शालीनता एवं सरलता से उन्हें प्रणाम किया। तो उनका गुस्सा भी शांत हो गया।
कथा के अंत में आयोजक मिथलेश मिश्रा ने आरती कर प्रसाद वितरित किया। इस मौके पर महंत हरिओम दुबे, जितेंद्र मिश्रा, कमलेश मिश्रा व कल्लू मिश्रा आदि मौजूद रहे।