कन्नौज। मरीजों के साथ हो रहे व्यवहार को जानकर आप वाकई में हिल जाएंगे। मरीजों को भीख की तरह सुबह-शाम भोजन दिया जाता है। भोजन लेकर आने वाली ट्रॉली वार्ड में भर्ती मरीजों को हाथ में रोटी थमा देती है और दलिया व सब्जी मरीज को तब ही मिलता है, जब उसके पास बर्तन हो। ज्यादातर मरीज गिलास या लोटा में दाल लेते हैं और हाथ में रोटी व सूखी सब्जी।
वैसे तो हर मरीज का भोजन उसकी बीमारी के हिसाब से होना चाहिए। डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में ऐसा नहीं है। अस्पताल में भर्ती उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी, दमा, टीबी के मरीजों को भोजन और नाश्ता एक सा ही दिया जा रहा है। डॉक्टर मरीज की डायट लिखने की जरूरत नहीं समझते। लिहाजा रसोई के मेन्यू के हिसाब से बनने वाला भोजन ही मरीज के पास तक पहुंचता है। कई बार जिम्मेदार अपनी सहूलियत के हिसाब से भोजन मुहैया करा देते हैं। बुधवार को अस्पताल में भर्ती मरीजों को दाल, सूखी सब्जी दाल, चावल और रोटी दी गई। डाॅक्टर के अनुसार खांसी, जुकाम के मरीज को मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए। इसी तरह अगर सांस और दमा का रोगी है तो उसे ठंडी चीजों की मनाही होती है, लेकिन अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को जो खाना उपलब्ध कराया जा रहा है, उसे खाना उनकी मजबूरी है।
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खाना बांटने में भी अव्यवस्थाएं हावी
अस्पताल में मरीज के तीमारदारों को अपने बर्तन लाने पड़ते हैं। उसमें दाल और सब्जी दी जाती। अगर मरीज के तीमारदार घर से बर्तन नहीं लाते हैं तो सूखी सब्जी व रोटी ही मरीज को खानी पड़ती है। तीमारदारों को सिल्वर पेपर में लपेटकर देने के बजाय रोटियां हाथ में ही थमा दी जाती हैं। कई बार हवा लगने से रोटी सूख जाने से बुजुर्ग मरीजों को खाने में दिक्कत होती है।
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सीएमएस बोले, कराएंगे जांच
इस मामले में सीएमएस डॉ. शक्ति बसु ने बताया कि इस प्रकरण की जांच करवाएंगे। अगर कहीं कोई गड़बड़ी मिलेगी तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी होगी।