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Kannauj News: गुलकंद की सुगंध से 30 लाख का टर्न ओवर

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कन्नौज। गुलाब की पंखुड़ियों और चीनी से बना गुलकंद, जो कभी केवल इत्र की नगरी की पहचान था, अब देश भर में अपनी सुगंध फैला रहा है। मोहल्ला नखासा निवासी बृजेश कुमार द्विवेदी ने 25 साल के इत्र कारोबार के अनुभव के बाद, वर्ष 2023 में पीएमएफएमई योजना के तहत 25 लाख रुपये का ऋण लेकर बड़े पैमाने पर गुलकंद उत्पादन शुरू किया। उनकी शुद्धता और विश्वसनीयता ने दो साल के भीतर ही उनके गुलकंद की मांग महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों तक पहुंचा दी है।
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बृजेश कुमार द्विवेदी के व्यवसाय का कुल वार्षिक टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये है। इसमें अकेले गुलकंद का योगदान 30 लाख है। इस उत्पादन प्रक्रिया में छह कारीगर नियमित रूप से रोजगार पाते हैं। गुलकंद की सर्वाधिक मांग फरवरी के अंतिम सप्ताह से मई तक रहती है, खासकर महाराष्ट्र और पंजाब राज्यों में। बृजेश कुमार द्विवेदी ग्राहकों की मांग पर ट्रांसपोर्ट के माध्यम से अपने उत्पाद की आपूर्ति करते हैं।
पारंपरिक विधि और स्वास्थ्य लाभ
गुलकंद का उत्पादन विशुद्ध रूप से पारंपरिक भारतीय विधि से होता है। इसमें लकड़ी के बर्तन में गुलाब की पंखुड़ियों और चीनी को लकड़ी के लट्ठे से घंटों तक कूटा जाता है। इस कुटाई के बाद, मिश्रण को करीब चार घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे चीनी पंखुड़ियों में अच्छी तरह समाहित हो जाती है और सुगंधित व पौष्टिक गुलकंद तैयार हो जाता है। इस प्रक्रिया में किसी मशीनरी का उपयोग नहीं होता, जिससे यह एक मेहनतकश काम बन जाता है। गुलकंद की पंखुड़ियों के वजन से दोगुनी मात्रा में चीनी मिलाई जाती है, जिससे 50 किलोग्राम पंखुड़ियों से लगभग 150 किलोग्राम गुलकंद तैयार होता है। गुलकंद न केवल अपने लाजवाब स्वाद के लिए पसंद किया जाता है, बल्कि यह स्वास्थ्यवर्धक और पाचक भी माना जाता है। इसकी ठंडी तासीर के कारण गर्मियों में इसका सेवन विशेष रूप से लाभकारी होता है। इसके अलावा, इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का स्वाद बढ़ाने में भी किया जाता है जिससे मिठाई कारोबारियों के बीच भी इसकी मांग बनी रहती है।
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